चोटीला। चामुंडा माताजी। चोटीला जानकारी। Chotila। Chamunda Mataji। Chotila Jankari। Travel Teacher

                   
                     नमस्कार दोस्तो, अगर आप गुजरात में हो या फिर गुजरात जा कर चोटीला में चामुंडा माताजी के दर्शन करना चाहते हो या फिर चोटीला के चामुंडा माताजी मंदिर की जानकारी पा ना चाहते तो, यह पोस्ट बिलकुल आपके लिए हैं। यहां में आपको चोटीला मंदिर के बारें में कुछ जानकारीयां दुंगा जो आपको बहुत फायदेमंद हो सकती हैं, और गुजरात की आपकी धार्मिक यात्रा आसान बन सकती हैं। दोस्तो, गुजरात पर्यटन बहुत ही विकसीत हैं इसलिए गुजरात में हर पर्यटन स्थल और धार्मिक स्थल पर काफी व्यवस्था और सुविधाएं देखने को मीलती हैं। जब आप गुजरात में हो तब धार्मिक स्थलो पर तो लगभग आपको खाने-पीने और रुकने ठहरने की चिंता नही करनी पडती। प्रसाशन के अलावा ट्रस्ट, मंदिर, सामाजिक संस्थाऐ बखुबी बहुत अच्छे तरीके से यह सब काम-काज संभालती हैं। तो आईऐ जानते हैं चोटीला के चामुंडा माताजी मंदिर के बारें में और यहां आप क्या कर सकते हैं, क्या-क्या व्यवस्था हैं, क्या-क्या सुविधाएं है।

चोटीला। Chotila
चोटीला एक पर्वत, पहाड या ऊंची चोटी का नाम हैं जो, गुजरात राज्य का लंडन शहर माने जाने वाला राजकोट शहर से महज 45km की दुरी पर स्थित हैं। चोटीला पर्वत की उंचाई समुद्र सतह से लगभग 1170 ft मानी जाती हैं, जिसकी तकरीबन 650 सिढीयां मुख्य मंदिर तक पहुचने के लिए चढनी पडती हैं जो, थोडी-बहुत यात्रालु, श्रद्धालु के लिए थकावट वाली हैं। चोटीला पर्वत की चोटी पर मां परमेश्वरी आदि शक्ति, जगत जननी मां जगदंबा का रोद्र रुप धरने वाली, मां चंडीका या मां चामुंडा का निज मंदिर हैं। चोटीला पर्वत की तलहटी में बसे नगर या शहर को भी चोटीला ही कहा जाता हैं, जो है तो राजकोट के पास परंतु नयें सिमांकन के बाद यह चोटीला सुरेंद्रनगर जिले का एक तहसील भी हैं! यानी चोटीला पर्वत, चोटीला शहर और चोटीला तहसील भी।

चामुंडा माताजी चोटीला। Chamunda Mataji Chotila
पुरातन समय में इसी क्षेत्र में चंड-मुंड नामक दो राक्षसो का बहुत प्रकोप बढ गया था, यहां बसने वाली प्रजा और रुषी-मुनीओं को बहुत प्रताडीत करते थे। चंड-मुंड का त्रास इतना बढ गया था की कोई देवीय शक्ति की मदद के बिना कोई उपाय नही था। वैसे मे यहां की प्रजा और रुषी-मुनीओं ने परममाया परमेश्वरी मां अंबाजी का आहवान कर, विधी विधान सहित पूजन-अर्चन करके जगत जननी मां जगदंबिका को चंड-मुंड के त्रास से छुटकारा पा ने के लिए प्रार्थना की, तब मां आदिशक्ति ने चंडीका बनकर, चामुंडा रुप धारण करके चंड-मुंड दोनो राक्षसो का वध करके वहां के लोगो को अधर्म और अन्याय से छुटकारा दिलाया, पुन: न्याय और धर्म का स्थापन कीया, जन जीवन फिर से सामान्य बनाया। रुषी-मुनीओं ने सामान्य जन, धर्म की रक्षा के लिए मां भगवती को सदा यहां बिराजमान होने के लिए बिनती की, तब से अभी तक अपने भक्त, दर्शनार्थी, श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण करने हेतु मां चामुंडा की यहा बैठक हैं। समस्त ब्रह्मांड को चलाने वाली मां आदिशक्ति की चौसठ कलायें यानी चौसठ यौगिनी में चामुंडा माताजी की गिनती होती हैं। मुख्य मंदिर के बाहर भगवान शंकर के अती रोद्र रुप और कल्याणमयी स्वयं दादा काल भैरवजी पहरा देते हैं। यहा पर मां चामुंडा स्वयंभु मुर्ति के रुप मे साक्षात बिराजमान हैं जो यहा आने वाले हर यात्रालु श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण करती हैं। सिर्फ गुजरात से ही नही, बल्की पुरे भारतवर्ष के साथ दुनिया के कई कोनो से चामुंडा माताजी से आशिर्वाद पा ने के लिए हर साल लाखो श्रद्धालु भक्त यहां आते हैं और मानसिक शांति की अनुभूति करते हैं। यह पवित्र मंदिर बहुत ही चमत्कारीक और दिव्य हैं, यहां पर कई श्रद्धालु भक्तो को चामुंडा माताजी के आशिर्वाद से संताने प्राप्त हुई हैं तो कई लोगो को अपने मन मुताबिक कार्य हुए हैं।

चोटीला मंदिर के बारें मे आस्था एवं मान्यता।
1.चोटीला पर्वत पर मंदिर में शाम की आरती के बाद किसी भी व्यक्ति को ठहरने दीया नहि जाता! खुद मंदिर के पूजारी भी शाम की आरती के बाद नीचे चले आते हैं, क्योकी शाम के बाद वहा मंदिर के पास शेरो की हाजरी होती हैं, शेर की आवा-जाही के कारण सब दर्शनार्थीयों को आरती के बाद नीचे उतार दीया जाता हैं, सुबह जब आरती का समय होता हैं तब मंदिर फिर से खुला रखा जाता हैं।
2.यहां आने वाला कभी निराश नही हुआ, कभी खाली हाथ नही लौटा ऐसे बहुत ही उदाहरण हैं ( जिसकी जैसी श्रध्धा ) ना सिर्फ अटके, अधुरें, उलझें बल्की बडे-बडे काम माताजी ने कई श्रद्धालु भक्त के पुरे किये हैं।
3.संतान प्राप्ती के सिवा एक मान्यता यह भी है की अगर बाल झडने की समस्या हो, गंजेपण की बढती समस्या हो तब यहा मां को चोटी चढाई जाती हैं।

चोटीला में क्या करें। Chotila me kya karen। What to do in Chotila
ज्यादातर माताजी के मंदिर पहाडी या पर्वत पर ही होते हैं, वैसे ही यह चामुंडा माताजी का मंदिर भी चोटीला पर्वत के उपर ऊंचाई पर हैं। मंदिर तक पहुचने के लिए आपको लगभग 650 सिढीयां चढनी होती हैं, यह चढाई के समय आप ऊंचाई से जमीनी द्रश्य देखने का मजा ले सकते हैं, कुदरती सौदर्य या नजारा देखने का मजा ले सकते हैं, ट्रेकींग के शोखीन सिर्फ सिढीयां चढ कर मजा ले सकते हैं। प्राकृतिक सौदर्य की आप फोटोग्राफी कर सकतें है, लेकिन आप निज मंदिर की फोटोग्राफी नहि कर सकते, क्योंकी यहां फोटोग्राफी करना मना हैं। चाहे आप अकेले हो, मित्रो के साथ हो, जिवनसाथी के साथ हो या फिर परिवार के साथ हो! आप साथ समय बिता कर अपने रिस्ते की यादें मजबूत और गहरी कर सकते हैं। इसके अलावा चामुंडा माताजी मंदिर मे आप पूजन-अर्चन, दर्शन कर सकते हो। मां के दर्शन के अलावा प्रकृति की सुंदरता का सीडीयां चढते हुए आनंद लेना एक मुख्य आकर्षण हैं। गुजरात के प्रसिद्ध देवी मंदिर मे यह चोटीला भी एक मुख्य मंदिर हैं।

चोटीला कब जायें। Chotila kab jayen
बारीश के दिनो को छोड कर सुखें दिनो मे आप कभी भी जा सकते हैं, अक्तुबर से मार्च तक समय चोटीला जाने के लिए बढीयां हैं। सडक मार्ग से आप चोटीला दिन-रात में कभी भी किसी भी समय आसानी से पहुच सकतें हैं।  इस मंदिर मे शाम की आरती के बाद दर्शन और यहा रुकना मना हैं क्योंकी, कहा जाता हैं की शाम के बाद इस मंदिर मे शेरो की आवा-जाही शुरु हो जाती हैं इसलिए यहा पर किसी को रुकने या दर्शन के लिए नहि जाने दीया जाता हैं। इसलिए आप यहा पहुचनें का ऐसा शिड्युल रखें की आप दिन मे दर्शन कर सकें। मंदिर में दर्शन कर के वापस नीचे तक आने में आपको शायद 2-3 घंटे का समय लग सकता हैं, उसके हिसाब से आप दर्शन की प्लानिंग करें। चैत्र मास के नौरात्र और अश्विन मास के नौरात्र में यहां पर ज्यादा संख्या में दर्शनार्थी, श्रद्धालु, यात्रालु आते हैं।

चोटीला में यात्रालु के लिए सुविधाएं।
चोटीला शहर बिलकुल चोटीला पर्वत की तलहटी मे बसा हुअा हैं, यहा आने वाले हर यात्रालु, श्रद्धालु के लिए रहने-रुकने और खाने-पी ने की उत्तम व्यवस्था हैं। अगर आप बहार रेस्टॉरंट या धाबें में खाना चाहें तो भी आप खा सकते हैं, बहुत सारें निजी रेस्टॉरंट और धाबें मौजुद हैं। अगर आप बहार होटल या गेस्ट हाउस में रुकना चाहो तो भी आप रुक सकते हैं, आपकी पसंद के बहुत सारे होटल और गेस्ट हाउस मौजुद हैं। मंदिर की तरफ से यहा पार्किंग की नि:शुल्क बेहतरीन व्यवस्था हैं, पार्किंग के लिए यहां आपको कोई भी चार्ज नही देना हैं। मंदिर में दर्शन के लिए आपको किसी भी प्रकार की कोई फिस या चार्ज नही देना हैं।

सभी से नम्र निवेदन हैं। Humble request to all
सभी श्रद्धालु, पर्यटक और यात्रीओ ध्यान रखें की गुजरात में जब आप यात्रा कर रहें हो विशेष कर जब कोई धार्मिक स्थल पर तो वहा आपको रुकने, रहने, खाने के लिए कई धार्मिक संस्थाओ और सेवाभावी व्यक्ति, परिवारो, समाजो द्वारा आश्रम चलायें जाते हैं। जहा रुकने की बेहतरीन व्यवस्था और खाने की उत्तम व्यवस्था होती हैं, तो आप वहा ही रुकने, खानें को प्राथमिकता दैं। यह सभी व्यवस्था नि:शुल्क होती हैं। आप जब भी ऐसे आश्रम या पंडाल मे रुके या खायें तब वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सम्मान जरुर करें, ऐसी सेवा मे उनका सिर्फ एक ही मतलब होता हैं "महेमान भगवान होता हैं, भुखे को अन्न, प्यासे को पानी, जन सेवा वही प्रभु सेवा।" अच्छे बर्ताव से कृपया उनका सहयोग करें, होसला बढायें। और वहा पर साफ-सफाई, स्वच्छता का जरुर ध्यान रखें। बहुत बहुत धन्यवाद।

चोटीला दर्शन समय। Chotila darshan timing
हर रोज सुबह के 6 बजें से शाम के 6:30 बजे तक मंदिर खुला रहता हैं और आप दर्शन कर सकते हैं।
The temple is open every day from 6 am to 6:30 pm and you can have darshan.
चोटीला आरती समय। Chotila Aarti timing
सोमवार से शनिवार सुबह के 6 बजें और शाम को 6 बजें।
रविवार को सुबह 5:30 बजें और शाम को 6 बजें।
Monday to Saturday is 6 in the morning and 6 in the evening. It is 5:30 in the morning on Sunday and 6 in the evening.

चोटीला कैसे पहुचें। Chotila kaise pahuchen। How to reach Chotila
हवाई मार्ग से : नजदिकी हवाई अड्डा राजकोट शहर का हवाई अड्डा हैं, वहा से फिर आप गुजरात सरकार की बसे या प्राइवेट ट्रावेल की बस का उपयोग कर के आप आसानी से चोटीला पहुच सकते हो। टेक्षी या केब सेवा के जरीए भी आप आसानी से चोटीला पहुच सकते हो। राजकोट से चोटीला महज 45km की दुरी पर स्थित हैं।
रेल मार्ग से : सबसे नजदिकी रेलवे स्टेशन राजकोट रेलवे स्टेशन हैं, जहा अहमदाबाद, वडोदरा, सुरत, मुंबई, दाहोद, रतलाम, इंदौर, भौपाल जैसे शहरो से ट्रेन उपलब्ध हैं। वहा से फिर आप गुजरात सरकार की बसे या प्राइवेट ट्रावेल की बस का उपयोग कर के आप आसानी से चोटीला पहुच सकते हो। टेक्षी या केब सेवा के जरीए भी आप आसानी से चोटीला पहुच सकते हो। राजकोट से चोटीला महज 45km की दुरी पर स्थित हैं।
सड़क मार्ग से : चोटीला एक बडा बस स्टेशन हैं, जो गुजरात के लगभग सभी बडे शहरो से जुडा हुआ हैं। चोटीला के लिए राजकोट, जामनगर, सुरेंद्रनगर, अहमदाबाद, अमरेली, जुनागढ, भावनगर, सोमनाथ, द्वारका, सुरत, वडोदरा, पालनपुर, गोधरा जैसे गुजरात के तमाम बडे शहरो से यहां के लिए बसे, गुजरात सरकार की और प्राइवेट ट्रावेल की उपलब्ध हैं। आप टेक्षी या केब का भी उपयोग कर सकते हैं। राजकोट से चोटीला महज 45km की दुरी पर स्थित हैं।

                     दोस्तो, यह थी चोटीला के चामुंडा माताजी मंदिर के बारें में कुछ जानकारी, आशा रखता हु यह जानकारी आपको जरुर पसंद आयी होगी और साथ ही कामना करता हु आपकी यात्रा आनंदमय मंगलमय हो। आप जहा भी यात्रा करें वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सम्मान जरुर करें, साफ-सफाई पर जरुर ध्यान दे, स्वच्छता का खयाल जरुर रखें। प्रकृति से आपका जुडाव और भी गहरा हो एसी प्रार्थना के साथ...
                     ।। जय माताजी, जय कुबेर ।।

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