गुजरात यात्रा

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गुजरात के प्रसिद्ध देवी मंदिर। Gujarat ke prasiddh Devi Mandir। Travel Teacher

नमस्कार दोस्तो,
हमारे देश भारतवर्ष में मां शक्ति के, मां दुर्गा के, कई मंदिर हैं जो हिंदुओं की आस्था का परम केंद्र हैं। मैं यहा आपको इस पोस्ट में देवी से जुडे सभी गुजरात के प्रसिद्ध देवी मंदिर के बारें मे कुछ जानकारी दुंगा जो धार्मिक स्थल के साथ पर्यटन स्थल भी हैं। संक्षिप्त विवरण के साथ गुजरात के देवी मंदिर की यह लिस्ट आपको गुजरात में कहा-कहा देवी या माताजी के मंदिर हैं यह जानने में आपको सहायक होगी।

1. अंबाजी। Ambaji

गुजरात के बनासकांठा जीले मे दुर्गा मां का यह पौराणिक मंदिर प्रमुख शक्तिपिठ हैं और हिंदु तिर्थयात्रीयों का प्रमुख तिर्थ स्थल भी हैं एवं गुजरात का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी हैं। यही पर ही भगवान श्री क्रिष्णा का मुंडन संस्कार हुआ था, स्वंय मां लक्ष्मिजी ' राणी रुकमणी' ने भी इसी जगह भगवान श्री क्रिष्णा के साथ विवाह हो इसलिए मां अंबाजी की उपासना की थी। त्रेतायुग युग मे भगवान राम भी अपने वनवास के दौरान यहा अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ मां दुर्गा का पुजन-अर्चन कर चुकें हैं, तो कुंति पुत्र भीम भी युद्ध में विजय प्राप्त कराने वाली माला "अजयमाला" मा अंबाजी से यही पर वरदान के तौर प्राप्त की थी। आस्था का परम केंद्र और पर्यटन का बेहद ही आकर्षक यह आरासुरी अंबाजी धाम उम्र के हर व्यक्ति का पसंदीदा पर्यटन एवं धार्मिक स्थल हैं। ज्यादा जानकारी के लिए यहा क्लिक करें...

2. अंबाजी, गब्बर गढ। Ambaji, Gabbar Gadh

यह स्थान मां दुर्गा के मुख्य मंदिर "अंबाजी" जो शक्तिपिठ अंबाजी से भी जाना जाता हैं वहा से 3-4 km की दुरी पर गब्बर नाम के पर्वत पर स्थित हैं। गब्बर गढ, गब्बर पर्वत, गब्बर चोटी, गब्बर अंबाजी, गब्बर गढ अंबाजी वगैरा नाम से पहचानी जाती हैं। मां अंबाजी की मुख्य बैठक इस गब्बर गढ पर मानी जाती हैं, इसलिए अंबाजी आने वाले हर यात्रालु, श्रद्धालु यहा पर दर्शन जरुर करता हैं। यहा दर्शन-पुजन के अलावा प्रकृति और रोप वे का आकर्षण मुख्य हैं।

3. महाकाली मंदिर पावागढ। Mahakali Mandir Pavagadh

गुजरात का प्रमुख एवं प्रसिद्ध यह मंदिर शक्ति का रौद्र रुप और दश महाविध्याओं मे प्रथम महाविध्या, सत्य का रक्षण करने वाली, असत्य, दुष्ट, पापी, अधर्म, दुश्मन का नाश करने वाली, कलयुग को हरने वाली, तुरंत प्रसन्न होने वाली मां महाकाली की यह प्रथम बैठक हैं। वडोदरा से 65km की दुरी पर स्थित यह पौराणिक मंदिर हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र और गुजरात का प्रमुख पर्यटन स्थल भी हैं। गुजरात मे देवी के प्रसिद्ध मंदिर मे यह महाकाली मां का मंदिर एक शक्तिपिठ हैं, जहा मां सती के शब से पैंरो की उंगलीया गीरी थी। यात्रालु-श्रद्धालु के साथ साथ प्रकृति प्रेमी और पर्यटको का भी पावागढ प्रमुख आकर्षण रहा हैं। पावागढ हिल, वास्तुकला, चांपानेर आर्कियोलॉजी पार्क और प्राकृतिक सौदंर्य के कारण साल के बारह महीना यहा भीड-भाड लगी रहती हैं। ज्यादा जानकारी के लिए यहा क्लिक करें...

4. चामुंडा मां चोटीला। Chamunda ma Chotila
गुजरात के राजकोट शहर से 45km की दुरी पर बसा यह स्थल चंड-मुंड नामक राक्षसो का वध करने वाली मां चामुंडा का मंदिर हैं। चोटीला एक पर्वत का नाम हैं, जीसके नाम यहा बसे विस्तार को भी चोटीला कहा जाता हैं, जो सुरेंद्रनगर जीले की तहसील हैं। यानी, चोटीला डुंगर, चोटीला शहर और चोटीला तहसील। चोटीला शहर बिलकुल चोटीला पर्वत की तलहटी मे बसा हुअा हैं,यहा आने वाले हर यात्रालु, श्रद्धालु के लिए रहने-रुकने और खाने-पी ने की उत्तम व्यवस्था हैं। सडक मार्ग से आप चोटीला दिन-रात मे कभी भी किसी भी समय आसानी से पहुच सकतें हैं। यहा पर मां चामुंडा स्वयंभु मुर्ति के रुप मे साक्षात बिराजमान हैं जो यहा आने वाले हर यात्रालु श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण करती हैं। इस मंदिर मे शाम की आरती के बाद दर्शन और यहा रुकना मना हैं क्योंकी, कहा जाता हैं की शाम के बाद इस मंदिर मे शेरो की आवा-जाही शुरु हो जाती हैं इसलिए यहा पर किसी को रुकने या दर्शन के लिए नहि जाने दीया जाता हैं। इसलिए आप यहा पहुचनें का ऐसा शिड्युल रखें की आप दिन मे दर्शन कर सकें। मां के दर्शन के अलावा प्रकृति की सुंदरता का सीडीयां चढते हुए आनंद लेना एक मुख्य आकर्षण हैं। गुजरात के प्रसिद्ध देवी मंदिर मे यह चोटीला भी एक मुख्य मंदिर हैं। ज्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें...

5. हरसिद्धी मां कोयला डुंगर। Harsiddhi Maa Koyla Dungar

हरसिद्धि माता मंदिर को हर्षद माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, जो पोरबंदर से लगभग 42 किलोमीटर दूर मियांनी गॉव नामक स्थान पर स्थित है। मुख्य मंदिर मूल रूप से समुद्र के सामने एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित हैं और ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी नगरी द्वारका के करीब बसे राक्षस का वध करने, आशिर्वाद प्राप्त करने हेतु मां हरसिद्धी की इस जगह पूजा की थी और तब से कोयला डूंगर नाम की पहाड़ी पर मां हरसिद्धी सदाय हाजरा हूजुर अपने भक्तो का कल्याण करने हेतु बिराजमान हुई हैं। पहाड़ी के ऊपर मूल मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान श्री क्रिष्णा ने किया है, भगवान श्री क्रिष्णा असुरों को हराने में सक्षम हुए तब इस सफलता के बाद, उन्होंने मंदिर का निर्माण किया। जब जरासंध मारा गया, तो सभी यादवों ने अपनी सफलता का जश्न मनाया और हर प्रकार की सिद्धी देने वाली मां का विधी-विधान सहीत पुजा-अर्चना की, तब से यादवों की कुलदेवी के रूप में मां पूजी जाती है। इसी स्थान से ही उज्जैन के महा पराक्रमी राजा विर विक्रमादित्य मां हरसिद्धी को वचनबद्ध करके अपने साथ ले जाने का प्रयास करा था,जीसकी वजह से मां दीन मे उज्जैन में निवास करती हैं और शाम होते ही गुजरात के इस स्थान पर  वापस आ जाती हैं। पोरबंदर और द्वारका के मुख्य हाईवे पर समुद्र के किनारें मीयानी नामक गाॉव में यह जगह हैं।

6. बहुचर माताजी। Bahuchar Mataji
गुजरात के मेहसाणा जिले के बेचराजी शहर में स्थित, यह मंदिर अहमदाबाद से 82 किमी और महेसाणा से 35 किमी   की दुरी पर है। मूल मंदिर का निर्माण  संभल राज नामक एक राजा ने करवाया था। मां दुर्गा का एक रुप अंबादेवी जो पितामह भीष्म से शादी करना चाहती पर भीष्म के मना करने पर उनसे बदला लेने के लिए शिखंडी नामक एक युवक के रूप में पुनर्जन्म लीया था। महाभारत युद्ध के दौरान यही शिखंडी पितामह भिष्म की मृत्यु का कारण बनता हैं। अंबादेवी को समर्पित यही वो मंदिर हैं, जीसकी गणना शक्तिपिठ में भी की जाती हैं।

7. अंबिका माताजी (खेडब्रम्हा)
गुजरात के साबरकांठा जीले में खेडब्रह्मा शहर मे बसा यह माता अंबिका मंदिर 'छोटी अंबाजी' या गुजराती में 'नानी अंबाजी' के नाम से भी जाना जाता हैं। खेडब्रम्हा शब्द से ही पता चलता हैं की कही ना कही शायद यह जगह ब्रह्माजी से जुडी हो,और यह बिलकुल सही हैं। लेकिन यह स्थान ब्रह्माजी से ज्यादा मां अंबिका मंदिर से ज्यादा पहचाना जाता हैं। अहमदाबाद से अंबाजी जाने वाले दुसरे रास्ते में यह स्थान पडता हैं,मतलब जब आप अंबाजी जा रहे हो तो आप यहा भी आसानी से विजिट कर सकते हैं। मुख्य मंदिर के अलावा परमार,चालुक्य,परिहार वास्तुकला के अच्छे नमुने भी आप यहा देख सकते हैं। यहा से अंबाजी सिर्फ 51 km दुर रह जाता हैं।

8. अंबाजी गिरनार। Ambaji Girnar
जुनागढ शहर से पूर्व मे 6km की दुरी पर पवित्र गिरनार के उपर और गिरनार की तलहटी मे कई देवी-देवता, रुषी-मुनीओं और दिव्य आत्माओं की कई जगह और मंदिर हैं। समुद्र सतह से लगभग 3320 ft उंचाई पर, लगभग 4840 सीडीयां के बाद, गिरनार के मुख्य शिखर पर... जगत जननी जगदंबा, मां भवानी, परममाया परमेश्वरी मां अंबा अपने भाई 'गिरनार' की रक्षा और अपने भक्तो को कल्याण हेतु सदाय बिराजमान हैं। गिरनार की चढाई करने वाला हर यात्रालु श्रद्धालु अंबाजी तक जरुर जाता हैं। ज्यादा जानकारी के लिए यहा क्लिक करें...

9. राजपरा,खोडीयार मां (भावनगर)
भावनगर से महज 7km दुरी पर मां खोडीयार का बहुत ही प्रसिद्ध और प्राचिन मंदिर हैं। यह चमत्कारीक प्राचिन मंदिर  हिंदु माई भक्तो में काफी प्रसिद्ध हैं। साल के बारह महीना श्रद्धालु भक्त की यहा भी काफी भीड-भाड रहती हैं।

10. माटेल, खोडीयार मां। Matel, Khodiyar maa
मोरबी जीले मे वांकानेर तहसील मे माटेल गांव मे मां खोडीयार का बहुत ही चमत्कारीक लगभग 1200 साल पुराना मंदिर हैं। यहा आने वाला हर यात्रालु, श्रद्धालु यहा गांव मे प्रवेश करने से पहले यहा पाऩी के स्त्रोत मे से अपने सर चढावा जरुर करता हैं। यहा पर मां खोडीयार का जो त्रिशुल हैं वो हर साल एक इंच बढ जाता हैं। हर जाती, हर समुदाय के लोग यहा मां से आशिर्वाद प्राप्त करनें हेतु आते हैं। मोरबी शहर से मात्र 23km की दुरी पर यह पवित्र स्थान हैं।

11.गलधारा, खोडीयार मां। Galdhara, Khodiyar maa
चुडासमा राजपुतो की कुलदेवी मां खोडीयार को समर्पित यह पवित्र स्थान अमरेली जीले के धारी शहर के पास स्थित हैं। राक्षसो का वध करनें के बाद मां खोडीयार ने अपना मनुष्य देह त्यागने के लिए यहा पर बहेती पानी की धारा मे अपना शरीर डुबाने का प्रयास करा! पर अपना मस्तक बहार ही भक्तो को दर्शन देने के लिए छोड दीया। यह मंदिर मे माताजी के मस्तक के ही दर्शन कर पातें हैं। पानी की धारा मे मां ने अपना शरीर गलायां इसलिए यह जगह का नाम "गलधारा" पडा। यह मंदिर 9 से 11 सदी के बिच निर्माण हुआ माना जाता हैं। धारी शहर से लगभग 5km की दुरी पर यह पवित्र मंदिर हैं।

12. कागवड खोडलधाम। Kagvad Khodaldham
गुजरात के 'खोडलधाम ट्रस्ट' द्वारा यह भव्य मंदिर ₹ 60 करोड की लागत से निर्माण हुआ हैं, जीस में "समस्त लेउवा पटेल" समाज का मुख्य योगदान हैं। इस मंदिर में अन्य चौदह देवीयों की भी स्थापना की गई हैं। राजकोट से 63km और जूनागढ से 48km की दुरी पर यह 'खोडलधाम' कागवड नामक गांव मे हैं।

13.उमीया मां ऊंझा। Umiya maa Unjha
माँ उमिया मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान शंकर ने गुजरात के मेहसाणा जिले के उंझा में की थी। ऊंझा गुजरात में अहमदाबाद शहर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह ऐतिहासीक मंदिर को मुघल लुटेरें अल्लाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलुग खान ने ध्वस्त कर लुट लिया था। गुजरात के समस्त कडवा पटेल समाज की कुलदेवी हैं उमीयां माताजी। यह मंदिर अहमदाबाद-पालनपुर हाईवे पर ऊंझा शहर मे स्थित हैं। ना केवल कडवा पटेल समाज किंतु हर समाज, हर जाती के लोग यहा दर्शन करते और मां से आशिर्वाद प्राप्त कर अपनी मनोकामना पूर्ण करतें हैं।

14. हरसिद्धी मां राजपीपला। Harsiddhi ma Rajpipla
बहुत ही शांत वातावरण का अनुभव कराने वाला मां हरसिद्धी का यह मंदिर स्टेच्यु ओफ यूनिटी के पास राजपीपला शहर में हैं। लगभग इ.स.1650 के आसपास यहा के राजकुमार श्री वेरीसाल मां हरसिद्धी को उज्जैन से यहां लेकर आयें थे। उन्होने सोचा अगर राजा परमविर विक्रमादित्य माताजी को उज्जैन ले जा सकतें हैं तो, मैं अपने साथ मां को उज्जैन से यहां क्यु नही ला सकता। हर बार उज्जैन न जाना पडे इसलिए राजकुमार श्री वेरीसालजी अपनी आस्था और भक्ती के बल मां हरसिद्धी को अपने साथ ला ने में सफल रहते हैं। तब से यहा राजपीपला मे मां हरसिद्धी बैठक हैं! आप अगर स्टैचू ओफ यूनिटी की विजिट करतें हैं तो यह मंदिर मे जरुर दर्शन करें और मां से आशिर्वाद प्राप्त करें।

15. सती अनसूया शिनोर। Sati Ansuya Shinor
वडोदरा के लगभग 48km दुरी पर शिनोर तहसील मे अंबाली नामक गांव में और पवित्र मां नर्मदा के किनारे सती अनसूया का मंदिर हैं।

16. आशापूरा मां कच्छ। माता नो मढ। Aashapura ma Kutch। Mata no Madh
कच्छ जीले में भूज शहर से 95km दुर नखत्राणा तहसील में जगत जननी जगदंबा मां भवानी 'आशापूरा मां' के नाम से बिराजमान हैं और इस चमत्कारीक मंदिर को गुजराती लोग 'माता नो मढ' ऐसे नाम से पहेचानतें हैं, पूकारतें हैं। 14 वी सदी में निर्मित यह मंदिर के प्रती लोगो की बहुत ही गहरी आस्था जुडी हुई हैं, यहा पर ही आशापूरा मां ने अपने व्यापारी भक्त को मुर्ति से हाथ निकाल कर दिन-दहाडे, जन मानस के सामने अपनी बैठक और हाजीरी का परिचय दीयां था। जाडेजा राजपूतों की कुलदेवी मां आशापूरा के दरबार मे हर समाज, हर जाती, हर वर्ग के लोग यहा पैंदल यात्रा करतें हैं, ज्यादातर नौरात्र में। यहा आने वाला हर श्रद्धालु भक्त कभी खाली हाथ नही लौटा, और लौटेगा भी कैसें? पुरे ब्रह्मांड का पालन करने वाली स्वयं मां अन्नपूर्णा 'आशापूरा मां' तो यही बिराजमान हैं।

17. याहा मोगी मां, देवमोगरा। Yaha Mogi ma Devmogara
नर्मदा जीले के सागबारा तहसील मे देवमोगरा नामक स्थल पर याहा मोगी मां बिराजमान हैं, जो सतपुडांतल पर्वतमाला के आदिवासी-भील समुदाय की कुलदेवी हैं। लेकिन हर समुदाय, हर जाती के लोगों मे मां याहा मोगी के प्रती गजब की श्रद्धा देखने को, सुनने को मिलती हैं। पुरे भारतवर्ष में हर महाशिवरात्री को जहां भगवान शिव के मंदिरो में मेलें लगते हैं, लेकिन देवमोगरा मे याहा मोगी माताजी के पवित्र स्थान पर शिवरात्री को बहुत बडा मेला लगता हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के ज्यादातर आदिवासी-भील समुदाय याहा मोगी माताजी को अपनी प्रमुख एवं प्रथम पूज्य देवी मानतें हैं। यहा भी दुसरें मंदिरो की तरह न केवल भील समुदाय लेकिन हर समुदाय, हर जाति के लोग दर्शन-पूजन करने आते हैं। बहुत ही चमत्कारीक और चर्चित यह मंदिर के प्रती श्रद्धालुओं की गजब की आस्था जुडी हुई हैं। जय याहा मोगी मां।

18. चामुंडा मां, ऊंचा कोटडा। Chamunda maa, Uncha Kotda

समुद्र के किनारे शांत एवं मनोरम्य वातावरण मे बसा ऊंचा कोटडा मे पथरीली बडी भेखड के उपर चामुंडा माताजी बिराजमान हुई हैं। बहुत ही नयनरम्य जगह पर बसा यह मंदिर मे हर साल दुर-दुर से श्रद्धालु-यात्रालु आते हैं और चामुडा माताजी से अपनी मनोकामना पूर्ण करने हेतु पूजन-अर्चन करतें हैं। भील समुदाय के श्रद्धालु भक्त "काळीया भील" को चामुंडा माताजी ने स्वयं दर्शन देकर काळीया भील की रक्षा की थी। महुवा शहर से महज 24km की दुरी पर समुद्र के पवित्र किनारे यह मंदिर हैं और भावनगर से लगभग 86km हैं।

19. मोगल मां, मोगलधाम भगुडा। Mogal maa, Mogaldham Bhaguda
गुजरात में चारण समुदाय और आहीर समुदाय की कुलदेवी के रुप में मोगल माताजी की पूजा होती हैं। द्वापरयुग में भगवान श्री क्रिष्णा ने भिमसेन को आदिशक्ति जोगमाया मोगल माताजी का एक घटना के रुप में दर्शन करवायें थें। इस चमत्कारीक और दिव्य मंदिर में माताजी को लापसी का प्रसाद चढायां जाता हैं, जो देवी मां को बहुत प्रिय हैं। साल के दोनो नौरात्र मे यहा बडी संख्या में दर्शनार्थी आते हैं , वैसे साल के हर महीनो यहा भीड-भाड लगी रहती हैं। हर श्रद्धालु-यात्रालु की मनोकामना पूर्ण करने वाली मोगल माताजी तळाजा से महज 23km और भावनगर से 74 km की दुर 'भगुडा' नामक जगह पर बिराजमान हैं, इस जगह को मोगलधाम भी कहतें हैं। पांडव, माता कुंता और नारायण को विशेष आशिर्वाद देनें वाली आदिशक्ति परमेश्वरी मां मोगल आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करें।

20. श्री वहाणवटी सिकोतर मां, रालेज। Shri Vahanvati Sikotar maa
सिकोतर मां को समुद्र या नदीयों की देवी भी कहा जाता हैं।  स्थानीय समुदाय की लोकबोली में 'सिकोतर' का अर्थ कोतर या भेखड में बसने वाली मां ऐसा होता हैं। वहाणवटी यानी समुद्र या नदी में चलने वाले वहाण-नाव पर रहनें वाली माताजी। जगडुशा नामक बडे वणिक व्यापारी के जब माल-सामान भरें जहाज दरीयां मे डुब रहें थे,तब माताजी नें जगडुशा की प्रार्थना से तुरंत ही बडे तुफान में भी जगडुशा और माल-सामान भरें सभी जहाजों की रक्षा करी थी और वही जगडुशा को दर्शन दीयें थे। श्री क्रिष्णा सहीत समस्त यादव कुल को जय और यश देने वाली, और परम पराक्रमी राजा विर विक्रमादित्य पर विशेष कृपा बरसाने वाली जगत जननी आदिशक्ति परमेश्वरी मां हरसिद्धी ही 'वहाणवटी सिकोतर मां' हैं। खंभात से लगभग 12km और वडोदरा से लगभग 68km दुर 'रालेज' नाम के गांव मे श्री वहाणवटी सिकोतर मां बिराजमान हैं। लाभ पंचमी को माताजी के मंदिर मे अन्नकुट होता हैं और साल की दोनो नौरात्र में यहा मेला लगता हैं। जय हो मां सिकोतर।

सभी से नम्र निवेदन हैं। Humble request to all
सभी श्रद्धालु, पर्यटक और यात्रीओ ध्यान रखें की गुजरात में जब आप यात्रा कर रहें हो विशेष कर जब कोई धार्मिक स्थल पर तो वहा आपको रुकने, रहने, खाने के लिए कई धार्मिक संस्थाओ और सेवाभावी व्यक्ति, परिवारो, समाजो द्वारा आश्रम चलायें जाते हैं। जहा रुकने की बेहतरीन व्यवस्था और खाने की उत्तम व्यवस्था होती हैं, तो आप वहा ही रुकने, खानें को प्राथमिकता दें। यह सभी व्यवस्था नि:शुल्क होती हैं। आप जब भी ऐसे आश्रम या पंडाल मे रुके या खायें तब वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सम्मान जरुर करें, ऐसी सेवा मे उनका सिर्फ एक ही मतलब होता हैं "महेमान भगवान होता हैं, भुखे को अन्न, प्यासे को पानी, जन सेवा वही प्रभु सेवा।" अच्छे बर्ताव से कृपया उनका सहयोग करें, होसला बढायें। और वहा पर साफ-सफाई, स्वच्छता का जरुर ध्यान रखें। बहुत बहुत धन्यवाद।
                     ।। जय माताजी, जय कुबेर ।।

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