नर्मदा स्नान महत्व। नर्मदा स्नान की जगह। कुबेर भंडारी करनाली। Narmada Snan Mahatva। Narmda Snan ki jagah। Kuber Bhandari Karnali। Travel Teacher

नर्मदा स्नान महत्व। नर्मदा नदी महत्व। नर्मदा स्नान की जगह। Narmada Snan Mahatva। Narmada Nadi Mahatva। Narmda Snan ki jagah
पुराणों में उल्लेख है कि समस्त संसार में एकमात्र मां नर्मदा ही है जिसकी परिक्रमा सिद्ध,तपस्वी,मुनी,साधु-संत,यक्ष, गंधर्व, किन्नर,पवित्र आत्मा,मानव आदि करते हैं। गंगाजी मे स्नान करने से जो पुण्य फल की प्राप्ती होती हैं,वो पुण्य फल सिर्फ मां नर्मदा के दर्शन मात्र से मील जाता हैं, मां नर्मदा अक्षय पुण्य देने वाली है। नर्मदा नदी में स्नान करने से मंगल, शनि, राहु, केतु के दोषों से मुक्ति मिलती है। मां नर्मदा नदी की उत्पति भगवान शिव से हुई थी, जिसके कारण यह नदी आद्य शक्ति के समान मानी जाती है। मां नर्मदा के दर्शन मात्र से सूर्य के समान तेज, चंद्र के समान सौम्यता, बुध के समान धैर्य और गुरु के समान धार्मिकता प्राप्त होती है। मां नर्मदा प्रलय मे भी अजर अमर रहती,मां नर्मदा का प्रलय मे भी नाश नही होता हैं और "मां नर्मदा के जीतने भी कंकर हैं वो सभी शंकर हैं" मां नर्मदा के कंकर की आप बिना प्राण-प्रतिष्ठा करे शिवलिंग के रुप मे पुजा कर सकते हैं,मां नर्मदा को यह विशेष आशिर्वाद भगवान शिव से प्राप्त हैं। पंडीतो का कहना हैं की मां नर्मदा अमावस्या तिथि मे विशेष फल दायीनी होती हैं। दोस्तो,धार्मिक पुजा का विधान हो,विशेष स्नान का विधान हो,तर्पण आदी क्रिया की बात हो या फिर पर्यटन की बात हो,गुजरात मे मां नर्मदा और मां नर्मदा के तटीय प्रदेश को ज्यादा पसंद कीया गया हैं। एसे मे अगर आप भी मां नर्मदा के दर्शन करना चाहते,स्नान करना चाहते है,या कोई विशेष पुजा-विधान करना चाहते हैं,तो एसी कौन सी जगह हैं? जो धार्मिक पर्यटन से जुडी हो, भरपुर मनोरंजन वाली हो और सभी धार्मिक क्रियाए भी आप एक जगह कर सको। तो दोस्तो,गुजरात मे मां नर्मदा किनारे बसी एसी ही एक जगह के बारे मे बात करुंगा जहा आपकी यह सारी जरुरीयात पुरी हो सके।
कुबेर भंडारी करनाली। कुबेर भंडारी मंदिर का महत्व।कुबेर भंडारी मंदिर जानकारी। Kuber Bhandari Karnali। Kuber Bhandari Mandir ka Mahatva। Kuber Bhandari Mandir jankari
जहा से मां नर्मदा का उदगम होता हैं और जहा मां नर्मदा समुद्र मे मिलती हैं,अमरकंटक से लेकर भाडभुज तक मां नर्मदा के किनारे कई पवित्र यात्रा स्थल हैं और आज हम एसे ही एक त्रेतायुग के पौराणिक मंदिर के बारे मे बात करेंगे,जो बहुत ही चमत्कारीक हैं। दोस्तो, वह मंदिर देवो के देव महादेव,कालो के काल महाकाल,भगवान शंकर को समर्पित 'कुबेर भंडारी' हैं। त्रिवेणी संगम पर स्थित मां नर्मदा के किनारे बसा यह कुबेर भंडारी मंदिर श्रद्धालुओ मे काफी आकर्षण जमाये बैठा हैं। वैसे तो हर दिन यहा भीडभाड लगी रहती हैं  पर हर अमावस्या को श्रद्धालु यहा बडी मात्रा मे आते हैं और यहा बडा मेला लगता हैं। हर अमावस्या को यहा लगभग पॉच लाख से ज्यादा श्रद्धालु,दर्शनार्थी,शिवभक्त दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए आते हैं। आने वाले यात्रीओ के लिए यहा निशुल्क भोजन की उत्तम व्यवस्था हैं और तकरीबन एक लाख से भी ज्यादा यात्री प्रसाद के रुप मे भोजन ग्रहण करते हैं। साथ ही यहा पार्किंग और शौचालय की व्यवस्था भी उत्तम हैं।भाजपा के सांसद स्वर्गिय अरुण जेटली साहब ने अपने कार्यकाल के दौरान यह गाँव दत्तक लिया था और उनके स्वर्गवास के बाद उनका अस्थि विसर्जन भी यहा पवित्र धाम कुबेर भंडारी मे कीया गया था।गुजरात,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,राजस्थान और भी कई जगह से दिन-प्रतिदिन यहा दर्शनार्थी आते रहते हैं। मानो यहा कुबेर भंडारी से कुछ लेकर जाने की जीद पुरी होती हो। प्राकृतिक सौदंर्य वाला यह  पौराणिक स्थल,त्रेतायुग और देवो के खजानची यक्षराज कुबेर की तपस्या से जुडा हुआ है। बहुत ही चमत्कारीक ये मंदिर शिवभक्तो और पर्यटको मे बहुत ही प्रसिध्धी पा चुका हैं।
चांदोद का धार्मिक महत्व। Chandod ka Dharmik mahatva
चांदोद यानी "दक्षिण प्रयाग" जो त्रिवेणी संगम माँ नर्मदा, औरसंग, और गुप्त सरस्वती नदी के तट पर स्थित है।त्रिवेणी संगम को हिंदुओं के बीच बहुत पवित्र माना जाता है। यह एक पौराणिक स्थल है और त्रिवेणी स्नान के लिए यह त्रिवेणी संगम उत्तम स्थान माना जाता है। यहा पर तर्पण,मुंडन,पनोती जैसी वैदिक क्रिया होती है। अस्थि विसर्जन और अंतिम संस्कार जैसी विधिया के लिए भी यह स्थल उत्तम माना जाता है। काशी,हरिद्वार,गया, प्रयाग,नासिक, मातृगया सिद्धपुर,रामेश्वरम,जीतना ही धार्मिक महत्व है,चांदोद का।
निलकंठधाम स्वामिनारायण मंदिर पोईचा।Nilkanthdham Swaminarayan Mandir Poicha
पोइचा एक सुंदर और बड़े क्षेत्र में निर्मित निलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर के लिए प्रसिध्ध है। यह अद्भुत तीर्थस्थल अपने दिव्य अनुभव के लिए पर्यटको को आकर्षित करता है। यह स्थान पर अनुशासन,मानवीय मूल्यों,सौंदर्य, प्रकृति की प्रशंसा और प्रार्थना की शक्ति,पर आपका ध्यान केन्द्रित हुए बिना नही रह सकता। उम्र के सभी वर्गो का पसंदीदा यह स्थल मनोरंजन के साथ पवित्रता,भक्ति जैसे दिव्य गुण भी आपके भितर स्थापित करता है। पर्यटन के लिए बच्चो और युवाओ का फेवरिट है यह स्थान। चांदोद,पोइचा,करनाली ये तीनो स्थल माँ नर्मदा के तट पर भौगोलिक तरीके से एसे बसे जैसे आपको भरपुर मनोरंजन,भक्ति,पवित्रता,उत्साह,सौदंर्य एक साथ दे सके।माँ नर्मदा के तट पर बिलकुल आमने सामने बसे ये तिनो स्थल पर आप एक के बाद एक स्थल पर आसानी से जा सकते है। अगर ये तिनो मे से कोइ भी एक जगह पहेले पहुच गये फिर भी आप दुसरी जगह आसानी से पहुच सकते हो।
कुबेर भंडारी कैसें पहुचे। How to reach Kuber Bhandari
हवाई मार्ग से। By air : सबसे नजदिकी वडोदरा ऐयरपोर्ट हैं,वहा से आप बस सेवा या टेक्षी सेवा का उपयोग कर के कुबेर भंडारी आसानी से पहुच सकते हैं।
रेल मार्ग से। By train : पश्विम रेलवे का वडोदरा रेलवे स्टेशन सबसे नजदिकी बडा रेलवे स्टेशन हैं,वहा से आप बस सेवा या टेक्षी सेवा का उपयोग कर के कुबेर भंडारी आसानी से पहुच सकते हैं।
सडक मार्ग से। By road : वडोदरा,सुरत,अहमदाबाद,राजपिपला जैसे शहरो से कुबेर भंडारी सडक मार्ग से जुडा हैं। वडोदरा से तकरीबन 60km दुुुरी पर स्थित हैं।
                      ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

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