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"जय गिरनारी धजा धारी, शिखर पर बैठ के ले खबर हमारी"
नमस्कार दोस्तो, हर हर महादेव,जय महाकाल।
दोस्तो,गिरनार जाने वाले या गिरनार के बारे मे जानना चाहते हैं वो सभी श्रद्धालु,दर्शनार्थी,भक्तगण,यात्रालु, पर्यटक के पास गिरनार की कुछ प्रारंभिक जानकारी हो और यात्रा के दौरान अपने आप गिरनार की यात्रा का मझा ले सके इस उद्देश से गिरनार के मंदिर और यात्रा स्थल की कुछ जानकारी आपके साथ साझा कर रहा हु।वैसे तो गिरनार दुसरे पर्वत की तरह ही हैं लेकिन, गिरनार का आकार शिवलिंग की तरह होने के कारण गिरनार को शिव स्वरुप माना जाता हैं। गिरनार मे पर्वत के उपर और तलहटी मे बसे सभी मंदिर एवं जगह का अपने आप मे एक बडा महत्व हैं,वैसे ही गिरनार की तलहटी मे एक मुख्य जगह,मुख्य मंदिर हैं,भवनाथ महादेव मंदिर।
भवनाथ महादेव महत्व।भवनाथ महादेव जानकारी।भवनाथ महादेव गिरनार जूनागढ।Bhavnath Mahadev Mahatva।Bhavnath Mahadev Jankari।Bhavnath Mahadev Girnar Junagadh
भवनाथ यानी भव-संसार के नाथ,देवो के देव महादेव भगवान शिव।जगत जननी जगदंबा मां पार्वती के पती,दुख भंजन,समस्त संसार को बनाने वाले,चलाने वाले और नाश करने वाले भवनाथ गिरनार मे स्वयंभु प्रकट हुए हैं।मनोवांच्छीत फल देने वाले भवनाथ महादेव के दर्शन,पूजन से सभी मनोकामना पुरी होती हैं।भवनाथ मे जो मृगीकुंड हैं जहा पर कार्तिक,महा,चैत्र,वैशाख महीने मे स्नान करके जो भी भवनाथ महादेव की पूजा करता हैं वो,सभी पापो से मुक्त हो जाता हैं। श्री भवनाथ महादेव की पूजा के लिए कार्तिकी सुद ग्यारस-एकादशी से पूर्णिमां और चैत्र सुद नवमी से पूर्णिमां तक के दिन अति उत्तम फल देने वाले माने जाते हैं। इसलिए यह दिनो मे भवनाथ महादेव की पूजा करनी चाहिए या किसी ब्राह्मण-पंडीत से करवानी चाहीए। काशीपुरी मे रहने से और मां नर्मदा के किनारे रहने से जो फल प्राप्त होता हैं वो मात्र भवनाथ महादेव के दर्शन मात्र से मीलता हैं। कुछ समय के लिए भवनाथ महादेव के पास रुकने को मीलना शास्त्रो ने बहुत ही दुर्लभ बताया हैं।जिसके भी प्राण भवनाथ महादेव के पास जाते हैं वो देवो के भी देव बन जाते हैं। यह भवनाथ महादेव की कृपा से ही 'कनोज के राजा भोज' राजपुत्र-ब्राम्हण-सर्प-मगर-पारधी-सिंह-भोजराजा होकर सात जन्मो के बाद मुक्ती पायी थी। उनकी रानी ने भी राजरानी-ब्राह्मणी-विप्रकन्या-यक्षिणी-मृगी-मृगमुखी-रानी होकर सात जन्म बाद मुक्ती पायी थी। यह स्थान पर कुंड राजा भोज ने निर्माण करवाया हैं,जहा पर लोग पिंडदान जैसी विधियां और दान-दक्षिणा देकर भवनाथ महादेव की पूजा करते हैं। मृगीकुंड के पास मे "कालमेघ" नामक भैरव बिराजमान हैं जो रुद्र के देव माने जाते हैं। भवनाथ के पास जो सुदर्शन तालाब हैं उसे भवनाथ तालाब से भी जाना जाता हैं। भवनाथ महादेव का विशेष पूजन महा शिवरात्री के दौरान होता हैं और यह शिवरात्री मेला भवनाथ मेले से प्रसिद्ध है। जो महा वदी नवमी तिथि से शिवरात्रि तक चलता हैं। यह भवनाथ शिवरात्री मेले मे दुनियाभर से यात्रालु,श्रद्धालु,दर्शनार्थी,साधु,संत,महंत,भक्त आते हैं।
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दोस्तो,इस मेले के शुरुआत महा वद नवमी से शुरु होकर शिवरात्रि तक चलता हैं। परिक्रमा मेला गिरनार के चारो तरफा लगता हैं जबकी यह मेला गिरनार की तलहटी भवनाथ मे लगता हैं।यह मेले मे ज्यादा श्रद्धालु भक्त हिस्सा लेते हैं।यह मेले की रोनक तो आप खुद शिवरात्रि मे यहा आकर ही यमझ सकते हैं।पाँच दिन तक बडा धार्मिक माहोल बना रहता हैं।इस शिवरात्रि के मेले भी आपको खाने-पीने,रुकने,ठहरने की कोइ दिक्कत नहि होती हैं।संतवाणी,संत्संग,भजन,लोक नाटक भवाई जैसे मनोरंजन की पाँच दिन तक भरमार रहती हैं। इस मेले मे आपको जाने-अनजाने कइ सिद्ध पुरुष,संत और दिव्य आत्माओ के दर्शन मिलते रहते हैं,जिन्हे हम संसारी लोग नहि समझ पाते। शिवरात्रि मे मध्यरात्रि को नागा साधुओ का बहुत बडा जुलुस निकलता हैं।यह नागा साधु का जुलुस भवनाथ मंदिर से शुरु होकर मृगी कुंड तक चलता हैं,जहा सब नागा साधु मृगी कुंड मे डुबकी लगाते हैं।यह माना जाता हैं की,यह जुलुस मे स्वयं भगवान शंकर और उनके गण भी साधु के रुप मे हिस्सा लेते है,दुसरी बात यह हैं की डुबकी लगाने वाले साधु-संत मे से सभी वापस नहि आते कइ साधु संत मृगी कुंड मे ही रह जाते हैं।यह जुलुस के दौरान इतनी ऊंची आवाज मे एक सुर मे "हर हर महादेव" का जयकारा होता है की मानो अगर भगवान शंकर भी ध्यान मे हो तो ध्यान से जाग जाये।यह जुलुस के दौरान ही नागा साधु धर्म की रक्षा के लिए अपने गुरु से प्राप्त अलग अलग शस्त्र विद्या दिखाते हैं जो किसी मार्शल आर्ट से कम नहि होती हैं।यह नागा साधु ओ का जुलुस शिवरात्रि का मुख्य आकर्षण हैं।
                         अलग अलग जाति और समुदाय के लोग इन दोनो पवित्र मेले मे एक साथ आते हैं इसलिए सामाजिक तौर पर भी बहूत महत्वपुर्ण हैं। यह मेले मे प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के दूसरे लोगों के साथ रहता है। गिरनार के इस दोनो मेलो मे आपको थोडे थोडे अंतर पर चाय,जलपान,खाना खिलाने वाले पंडाल लगे हुए मिलते हैं,जो सेवाभावी संस्थाए या सेवाश्रमो द्वारा लगाये जाते है।मतलब खाने-पीने की आपको पुरी मेले के दौरान बिलकुल भी चिंता करने की जरुरत नहि होती हैं।और वो भी बढीया क्वोलिटी वाला,फाईव स्टार होटल का खाना भी इस प्रसाद के आगे कुछ नहि हैं।भंडारे वाले पंडाल के सामने बडी उंची आवाज मे खाना खिलाने के लिए गुजराती मे आवाजें लगी रहती हैं " हरीहर करी ल्यो,हरीहर करी ल्यो " मतलब प्रसाद ग्रहण कर लो।जुनागढ शहर प्रसाशन,वन विभाग और पुलिस इन तीनो का काम बडा सराहनीय होता हैं।पुलिस सीसीटीवी और खडे पाँव,वन विभाग जंगली हिसंक पशुओ की निगरानी कर के,जुनागढ शहर प्रसाशन बढीया इंतजाम कर के गिरनार के इन दोनो मेलो को सफल बनाते हैं।आपको थोडी थोडी दुरी पर पंडालो मे(स्थानीक लोगो से "ऊतारा या ऊतारो " एसा सुनाइ देगा)भजन,सत्संग,कथा,नाटक,भवाई वगेरा का भी भव्य मनोरंजन मिलता हैं।आपको चलते,उठते-बैठते,घुमते-फिरते,सोते "जय गिरनारी,जय गिरनारी" या फिर "हर हर महादेव" के नारे या उंची आवाजें सुनाई देगी,क्योकी पुरा माहोल भक्तिमय के साथ भगवान शंकर मे डुबा हुआ रहता हैं।आपको एसा लग सकता हैं की आप गुजरात के जुनागढ मे नहि किंतु भगवान शंकर के किसी लोक मे मौजुद हैं।ज्यादातर आपको भगवा लपेटे और भस्म के शृंगार वाले साधु-संत के साथ साथ कइ व्यक्ति भी दिखाइ देंगे।अगर आप सिर्फ एक सैलानी के तौर पर यहां जाना चाहते हैं, तब भी आपको निराशा नहीं होगी। गिर के जंगल दुनियाभर में अपनी साख रखते हैं।
गिरनार कैसें पहुचे।जूनागढ कैसे पहुचे।How to reach Girnar।How to reach Junagadh:
गिरनार पहुचने के लिए आपको जुनागढ शहर को ध्यान मे रखना पडेगा क्योकी गिरनार पर्वत जुनागढ शहर से 4km दुरी पर स्थित हैं।
हवाई मार्ग से जूनागढ कैसे पहुचे।
जूनागढ़ का अपना हवाई अड्डा नहीं है और निकटतम हवाई अड्डा राजकोट,पोरबंदर और केशोद हवाई अड्डे हैं। राजकोट और पोरबंदर हवाई अड्डों पर मुंबई से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। जूनागढ़ पहुंचने के लिए हवाई अड्डों के बाहर से टैक्सिया या बसों द्वारा आप जुनागढ पहुच सकते हैं।
राजकोट हवाई अड्डा 103km
पोरबंदर हवाई अड्डा 113km
केशोद हवाई अड्डा 40km
सड़क मार्ग से जूनागढ कैसे पहुँचे।
नियमित बस सेवा से जूनागढ़ गुजरात के अन्य स्थानों से जुड़ा हुआ है जैसे अहमदाबाद, भुज, भावनगर, द्वारका, सोमनाथ,पोरबंदर और राजकोट,वडोदरा,सुरत,मुंबई इन शहरों से जूनागढ़ पहुचने के लिए निजी और GSRTC वाली दोनों तरह की बसें कार्यरत हैं।
रेल मार्ग से जूनागढ कैसे पहुँचे।
जूनागढ़ जंक्शन स्टेशन, जो शहर के केंद्र से लगभग 1 किमी दूर स्थित है,मुंबई,राजकोट,अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम,पुणे और जबलपुर जैसे स्थानों से ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
                        दोस्तो,यहा पर एक बात पक्की हैं,'गिरनार मे कुछ समय बिता कर ही आप सनातन हिन्दु धर्म की प्रारंभीक जानकारी का अनुभव कर सकते हैं। जब आप गिरनार मे होंगे तब मानो आप शिव परिवार या नवनाथ, सिद्ध चौरासी या फिर किसी पवित्र आत्मा के सामिप्य मे हो एसा महसुस कर सकते हो।अगर आप पर्यटन के शौखीन है,शिवभक्त हैं,जैनधर्मी है,हिंदु संस्कृति के चाहने वाले हैं या सौराष्ट्र के लोगो के बारे मे जानना चाहते हैं तो,साहब एक बार आप शिवरात्री के या परिक्रमा मेले मे जरुर जाये।दोस्तो,आशा रखता हु यह कुछ जानकारी आपको पसंद आयी होगी,साथ ही कामना करता हु आपकी यात्रा आनंदमय,मंगलमय हो।आप जहा भी यात्रा करे पर्यावरण का,स्वच्छता का ध्यान रखे और वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सन्मान जरुर करें।
                   ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

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