सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात।Somnath Jyotirling Gujarat।Travel Teacher

भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग है। यह भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात मे पश्चिम मे समुद्र तट पर स्थित है। गुजरात के सोराष्ट्र पंथक मे प्रभास पाटन नामक तिर्थ क्षेत्र मे यह मंदिर प्राचीन त्रिवेणी संगम तीन नदिया कपिला, हिरन और गुप्त सरस्वती के संगम पर स्थित है। यह मंदिर पूरे विश्व मे बसे लाखों हिंदु भक्तों और को हर साल आकर्षित करता है। यह मंदिर भूतकाल में कई आक्रमणो का सामना कर चुका है। सोमनाथ मंदिर की भव्यता,किर्ती,प्रसिद्धी ईतनी थी अफगानिस्तान से मुघल लुटेरे खिचे चले आये थे,महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब जैसे मुघल लुटेरो के द्वारा मंदिर को सत्तराह बार लूटा गया और विध्वंश किया गया था। इस मंदिर का पुनर्निर्माण महारानी अहिल्याबाई ने करवाया था और सन् 1951 मे तत्कालिन गृह प्रधान श्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर का जिर्णोद्धार और पुन:र्निर्माण करवाया था।यह मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। इसके शिखर पर स्थित कलश का भार दस टन है और इसकी ध्वजा 27 फुट ऊंची है।यह मंदिर करीब 10 किलोमीटर के विशाल क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसमें करीब 42 मंदिर है। 

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा।Somnath Jyotirling ki katha।Story of Somnath Jyotirlinga
प्रजापती दक्ष राजा की 28 पुत्रीया थी उसमे से सबसे बडी बेटी 'सती' का विवाह भगवान शिव से कीया गया था और बाकी सत्ताइश का विवाह चंद्र देव के साथ कीया गया था।लेकिन चंद्र देव अपनी सत्ताइश पत्नीओ मे से सिर्फ 'रोहिणी' नामक पत्नी को ही प्यार करते थे।तब बाकी सारी कन्याओ ने दक्ष राजा को फरियाद की के,चंद्र देव सिर्फ रोहिणी के साथ ही पत्नीवत् व्यवहार करते हैं और हम सभी को पत्नी होने के सुख से वंचित रखते हैं। राजा दक्ष प्रजापति ने इसके लिए चंद्र देव को बारंबार,सभी पत्नीओ के प्रती समान व्यवहार करने को समझाया। परंतु चंद्र देव के मन मे सिर्फ रोहिणी के लिए ही अनुराग ज्यादा था। इसलिए राजा दक्ष प्रजापती की समझावट का उनके हृदय पर इसका कोई असर नहीं हुआ।तब राजा दक्ष क्रोधित हो गये और चंद्र देव को क्षय रोग होने का श्राप दे दीया। इस शाप के कारण चंद्र देव तुरंत क्षयग्रस्त हो गए। उनके क्षयग्रस्त होते ही ब्रम्हाण्ड मे समग्र जगह पर कोमलता,शीतलता,मधुरता जैसे गुणो से संचालित सारे कार्य रुक गये। ब्रम्हाण्ड मे चारों ओर हाहाकार मच गया और चंद्र देव की स्थिति दिन प्रतिदिन बद्दत्तर होती गई। चंद्र देव की यह हालत देखकर और सृष्टी के सारे कार्य जो चंद्र देव से चलने वाले वो रुके नही इसलिए सभी देवता,मुनिगण, वसिष्ठ आदि ऋषिगण उनके उद्धार के लिए पितामह ब्रह्माजी के पास गए। सारी बातों को सुनकर ब्रह्माजी ने उपाय बताया की  'चंद्र देव अपने श्राप से मुक्त हो जाये इस के लिए अन्य देवताओ के साथ पवित्र प्रभासक्षेत्र में जाकर मृत्युंजय भगवान शिव की उपासना करें। भगवान शिव की कृपा से अवश्य ही चंद्र देव का श्राप समाप्त हो जाएगा। पितामह ब्रम्हाजी के कहने अनुसार चंद्र देव अन्य देवताओ के साथ भगवान शिव की आराधना करने प्रभास क्षेत्र गये। चंद्र देव ने घोर तपस्या कर के भगवान शिव को प्रसन्न कीया और मृत्युं को जीतने वाले भगवान शिव से अमरत्व का वरदान प्राप्त किया। भगवान शिव ने चंद्र देव को वरदान दीया की, "कृष्णपक्ष में प्रतिदिन तुम्हारी एक-एक कला कम होती जायेगी और शुक्ल पक्ष में उसी क्रम से तुम्हारी एक-एक कला बढ़ती रहेगी। इसी तरह तुम्हारी अमावस्या मे  कोई कला नहि होगी और प्रत्येक पूर्णिमा को तुम पूर्ण कला  प्राप्त करोगें। एसें तुम श्राप से मुक्त भी हो जाओगें और प्रजापति दक्ष के वचनों की रक्षा भी हो जाएगी" ।चंद्र देव को मिलने वाले इस वरदान से सारे लोकों मे सृष्टी प्रणाली के सारे कार्य पुन: सुमधुर तरीके से चलने लगे। श्राप से मुक्त होकर चंद्र देव ने अन्य देवताओं के साथ मिलकर भगवान शिव से प्रार्थना की 'आप माता पार्वतीजी के साथ सदा के लिए प्राणों के यहा निवास करें। भगवान शिव चंद्र देव और अन्य देवताओ की इस प्रार्थना को स्वीकार करके ज्योतर्लिंग के रूप में माता पार्वतीजी के साथ तभी से यहाँ रहने लगे। 'सोम' यानी चंद्र और नाथ यानी 'स्वामी' चंद्र के स्वामी यानी सोमनाथ महादेव।इस तरह भगवान शिव प्रथम ज्योतिर्लिंग के रुप मे अभी तक सर्व प्राणीओ के कल्याण के लिए यहा बैठे है।

प्रभास तिर्थ का महत्व।Prabhas Tirth ka mahatva।Importance of Prabhas Tirth
चंद्र देव ने यह जगह पर अपनी रौनक एवं चमक पायी इसलिए यह क्षेत्र को प्रभास नाम पडा,प्रभास यानी चमक या रौनक। मुख्य सोमनाथ मंदिर चंद्र देव द्वारा सोने से बनाया गया था,बाद मे मलबे मे दब जाने के बाद लंकापति रावण ने चांदी से बनाया था। उसके बाद द्वापरयुग मे भगवान श्री कृष्ण ने लकडी से बनाया था।फिर से नष्ट हो जाने पर पथ्थर की चट्टान मे से निर्माण कीया गया था। आदि ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की छटा ही निराली है। यह तीर्थस्थान देश के प्राचीनतम तीर्थस्थानों में से एक है और इसका उल्लेख स्कंदपुराण श्रीमद्‍भागवत गीता, शिवपुराणम आदि प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। यह लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग है। इस सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन,पूजन,आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं और भगवान्‌ शिव और माता पार्वती की अक्षय कृपा प्राप्त होती हैं। मोक्ष का मार्ग उनके लिए सहज ही सुलभ हो जाता है और सारे कार्य सफल हो जाते हैं। यह तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध, नारायण बलि आदि कर्मो के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्रपद, कार्तिक माह में यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है। इन तीन महीनों में यहां श्रद्धालुओं की बडी भीड़ लगती है। इसके अलावा यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का भी विशेष महत्व है।

सोमनाथ के मुख्य आकर्षण।Somnath ke mukhya aakarshan।Main attraction of Somnath
सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है।सोमनाथ मंदिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के आधीन है। सरकार ने ट्रस्ट को जमीन, बाग-बगीचे देकर मंदिर का अच्छे से सुशोभन करवाया है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के प्रांगण में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है,जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बड़ा ही सुंदर सचित्र तरीके से वर्णन किया गया है। सोमनाथ में समुद्र तट, संग्रहालय और अन्य आकर्षण भी हैं। जबकि सोमनाथ मंदिर और सोमनाथ समुद्र तट यहां घूमने के लिए प्रमुख स्थान हैं, गीता मंदिर, भालका तीर्थ, कामनाथ महादेव मंदिर, सोमनाथ संग्रहालय कुछ अन्य स्थान हैं, जो पर्यटन के लिए काफी प्रसिद्ध है।

सोमनाथ मंदिर टाईमिंग।Somnath Mandir Timing
दर्शन : सुबह 6:00 बजे से रात के 8:00 बजे तक दर्शन कर सकते है।
आरती : सुबह 7:00 बजे,दोपहर 12:00 बजे,शाम 7:00 बजे सोमनाथ महादेव मंदिर मे आरती होती हैं।

सोमनाथ कैसे पहुंचें।How to reach Somnath
हवाई मार्ग से : 
सबसे नजदिकी हवाईपट्टी 55km की दुरी पर केशोद एयरपोर्ट हैं,जहा की उडाने सीधे मुबई से जुडी है।फिर वहा से आप बस या ओटो टेक्षी से सोमनाथ पहुच सकते हैं।
रेल मार्ग से :
सोमनाथ के सबसे समीप वेरावल रेलवे स्टेशन है, जो वहां से मात्र सात किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहाँ से अहमदाबाद व गुजरात के अन्य स्थानों का सीधा संपर्क है।
सड़क परिवहन से :
सोमनाथ गुजरात के सभी बडे शहर के सडक परिवहन से जुडा हुआ पर्यटन स्थल हैं और बस सेवा उपलब्ध हैं। मुंबई 889 किलोमीटर, अहमदाबाद 400 किलोमीटर, भावनगर 266 किलोमीटर, जूनागढ़ 85 और पोरबंदर से 122 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

जरुरी सुचना : इस स्थान पर तीर्थयात्रियों के लिए गेस्ट हाउस, विश्रामशाला व धर्मशाला की व्यवस्था है। साधारण व किफायती सेवाएं उपलब्ध हैं। वेरावल में भी रुकने की व्यवस्था हैैैै।सोमनाथ मंदिर मे फोटोग्राफी बिलकुल निषेध हैं मंदिर मे जाने से पहले कोई भी मेटल की चिज आप अपने साथ नहि ले जा सकते हैं,अपने सामान,केरी बेग वगैरा बाहर ही छोडकर आप मंदुर मे प्रवेश कर सकते हैं।इसके लिए सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने पुरा इंतजाम कीया हुआ हैं।

                         ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. सोमनाथ के नजदिकी दुसरे दर्शनिय स्थल के बारे मे भी लिखना,क्योकी कोइ दुर से आयेगा तो आसपास की दुसरी जगहें भी घुमेगा।पवन दुबे।

    जवाब देंहटाएं