गिरनार की जानकारी। Girnar ki jankari। Information about Girnar । Travel Teacher

Image : Ranjit Vasava

                        असंख्य पर्यटन स्थल वाला गुजरात पर्यटन की दृष्टि से काफी संपन्न है। गुजरात अपने कई मंदिरों,समृद्ध परंपरा,जीवंत संस्कृति,वन्य जीव अभ्यारणों,प्राकृतिक सौंदर्य,स्वादिष्ट व्यंजनों और समुद्र तटों के लिए विश्व मे प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा भी यात्रा और घूमने के लिए गुजरात मे बहूत कुछ हैं।दोस्तो,आज हम विर,क्षमाशील,दयालु,संत,भक्त,कलाकार,कवि,लेखक,से ज्यादा पहचाने जाने वाली सौराष्ट्र यानी काठीयावाड की भूमि पे बसे गिरनार के बारे मे बात करेंगे। गिरनार सिर्फ एक पर्यटक स्थल नहि बल्की इतिहास की साक्षि वाली धरोहर हैं। ज्यादातर यात्री यहां पर होने वाले गिरनार परिक्रमा महोत्सव या फिर शिवरात्रि के मेले के दौरान आते हैं,और दोनो समय भव्य मेले आयोजित किए जाते हैं।

हिंदु और जैन यात्रा स्थल गिरनार। Hindu Aur Jain Yatra Sthal Girnar
गिरनार भारत के महत्वपूर्ण यात्राधामों में शामील है और इसके पांच मुख्य शिखरों पर हिंदू और जैन मंदिर बसे हैं,जहा दतात्रेय मंदिर अंतिम शिखर पर स्थित हैं,मानो यह गिरनार पर्वत की चोटी पर झूल रहा हो। यहा पर चढ़ाई के दौरान आपको आसपास के बहुत ही खूबसूरत प्राकृतिक नजारे दिखाई देते हैं। पांचों चोटियों को आपस में जोड़ती सिढीया से चलते हुए यात्रियों को हिन्दू धर्म के विभिन्न पंथों और जैन धर्म से जुड़े बहुत ही आकर्षक और सुंदर प्राचीन मंदिर देखने को मिलते हैं। गगनचुम्बी विशाल गिरिमालाओं के बीच पवित्र गिरनार तीर्थ जैन धर्म और हिन्दू धर्म दोनों का आराध्य स्थल है। गोरक्षनाथ मंदिर,दत्तात्रेय मंदिर,अंबा माता मंदिर,भगवान नेमिनाथ मंदिर और कुछ अन्य मंदिर हैं जो देखने लायक स्थल हैं। हिन्दु घर्म के अनुसार तीन देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अवतार गुरु दत्तात्रेय हैं और गुरु दत्तात्रेय से ही नाथपंथ की शुरुआत हुई थी,जिसे बाद मे गुरु मत्सेन्द्रनाथ और गुरु गोरखनाथ के साथ नवनाथो ने नाथपंथ को आगे बढाया। इस नाथपंथ के नागा साधु-संतो द्वारा इस स्थान का भ्रमण किया जाता है। कई साधुओं का दावा है कि उन्होंने गुरु दत्तात्रेय के दर्शन करे है। गिरनार पहाड़ी की चोटी पर स्थित आकर्षक मंदिरों का समूह जैन धर्म के लिए पवित्र और एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। जैन तीर्थयात्री गिरनार को नेमिनाथ पर्वत कहते हैं। गिरनार पर्वत पर 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ ने 700 वर्ष तक तपस्या कर के कैवल्य ज्ञान (मोक्ष) प्राप्त किया था। जैनो के लिए यह सिद्धक्षेत्र माना जाता है।

गिरनार की चढाई। Girnar ki chadhai
दोस्तो,अब हम पवित्र गिरनार की चढाई की संक्षिप्त मे बात करेंगे, पहली सिढी से लेकर आखरी सिढी तक। पवित्र गिरनार के कितने शिखर हैं,चढते वक्त कहा रुका जाता हैं,कहा कौन सी जगह हैं,कितनी उंचाई हैं,वगेरा वगेरा। तो चलो दोस्तो शुरु करते हैं। दोस्तो,जहा से गिरनार की चढाई शुरु होती हैं वहा पर विरो के विर महाविर,रुद्र अवतार,रामभक्त,श्री अंजनी पुत्र,महाबली बजरंगबली बिराजमान हैं। यात्रालु,श्रद्धालु,साधु-संत,भक्त हनुमीनजी के दर्शन करके,अनुमती लेकर पवित्र गिरनार की कठीन चढाइ शुरु करते हैं।कही कही बिच मे कुछ झौपडीया-कोटेज आते हैं। कुछ सिढीया के बाद राजा भरथरी गुफा आती हैं,जहा पर राजा भरथरी,गोपीचंद ने कई सालो तक तप कीया था जो अब मुर्ति के रुप मे यहा बिराजमान हैं। तकरीबन 2300 सिढीया पर माळी परब यानी विश्रामघाट की जगह आती हैं। जिसकी उंचाइ लगभग 1880 feet मानी जाती हैं।यहा पर यात्रालु के लिए पानी पीने,खाने और आराम करने के लिए सुंदर जगह हैं। जहा भगवान श्री राम का मंदिर भी हैं।फिर वहा से आगे राणकदेवी शिला और कबुतरी खाण आती हैं।उसके बाद लगभग 3500 पर "सुवावडी पगला" नाम की जगह आती हैं,जहा पर गर्भवती महिला अपनी रक्षा के लिए नमन वंदन करती हैं। उसके बाद गुरुदत्त गुफा और पंचेश्वर महादेव नामक जगह आती हैं,जहा सुंदर पानी का बहाव हैं। तकरीबन 3800 सिढीया खतम होने पर "गिरनार कोट और सुंदर जैन मंदिर आते हैं।यहा पर भगवान नेमिनाथ का बेहद ही खुबसुरत और आकर्षक मुख्य मंदिर हैं। स्वर्ग सी सुंदरता और आकर्षक शैली के जैन धर्म के देवो के सुंदर मंदिर यहा पर हैं।कोट के अंदर जैन धर्म के जाहोजलाली वाले मंदिर हैं और बांयी और कुछ छोटे सरोवर हैं।कोट के अंदर जैन यात्री के लिए रुकने ठहरने की पुरी व्यवस्था भी हैं।थाडी दुरी पर " सातपुडो या जटाशंकर धर्मशाला आती हैं।यहा सात पथ्थर मे से पानी निकलता हैं इसलिए गुजराती मे शायद "सातपुडो" एसा बोला जाता हैं।यह पानी उत्तम गुण वाला माना जाता हैं।उसके बाद दांयी और जाते लगभग 4800 सिढीया खत्म होते ही समस्त सनातन हिंदु धर्म की जगत जननी मां जगदंबा का मंदीर आता हैं,जो तकरीबन समुद्र सतह से 3300 feet की उंचाई पर स्थित हैं। अंबाजी से आगे बढते लगभग 5200 सिढीया पर योगाचार्य गुरु गोरखनाथ की जगह आती हैं,जहा पर गुरु गोरखनाथ ने तप कीया था और राजा भर्तुहरि,राजा गोपीचंद,नवनाथ, चौराशी सिद्धो को उपदेश दीया था। यह पवित्र गिरनार की सबसे उंचाई वाली जगह मानी जाती हैं,जीसकी उंचाई समुद्र सतह से लगभग 3700 feet तक गिनती की गइ हैं। यहा से आगे बढते लगभग 850 सिढीया के पास दो रास्ते होते हैं, 210 सिढीया नीचे "कमलकुंड" नामक जगह हैं और 700 सिढी उपर गुरु दत्तात्रेय टुंक हैं,जहा ब्रम्हा,विष्णु,महेश के अंश गुरु दत्तात्रेय की चरण पादुका हैं। यहा से आगे और कोइ मार्ग नहि हैं,गिरनार चढाई मे यह स्थान अंतिम पडाव हैं।(नोट:दोस्तो, यहा पर औघड,कालीक,गौ गंगा नामक जगह का विवरण सिढीयो के आंकडो की वजह से नहि दे रहा हु)

गिरनार की जानकारी। Girnar ki jankari
जुनागढ शहर से पूर्व द्वार से लगभग चार कि.मि दुर गिरनार पर्वत हैं। जुनागढ शहर के किले से तुरंत गिरिनार की गिरिमाला की शुरुआत होती हैं।गिरनार पे चढाई की शुरुआत भवनाथ तलहटी से होती हैं ।

गिरनार के शिखर। Girnar ke Shikhar: अम्बाजी, गोरख,दत्तात्रेय, औघड, कालिक यह पांच मुख्य शिखर हैं।
गिरनार की उंचाई। Girnar ki unchai : गिरनार की उंचाई समुद्र सतह से लगभग 3700 feet तक विशेषग्यो ने बतायी हैं,जिस मे गोरखनाथ शिखर 3766 feet उंचा माना जाता हैं,दत्तात्रेय शिखर 3295 feet,अम्बाजी लगभग 3300 feet,गौमुखी गंगा 3100 feet,माळी परब 1880 feet माना जाता हैं।
गिरनार का क्षेत्रफल। Girnar ka kshetrafal : गिरनार का क्षेत्रफल 45075 Acre से ज्यादा हैं।
गिरनार के पर्वत। Girnar ke parvat :गिरनार गिरिमाला मे उत्तर से दक्षिण की और चलते बाबरीयां,खोडीयार, लाखामेडी,काबरा,कनैया,गद्धाकोट,लामधार,तटकीयो नामक डुंगर हैं,इसके अलावा भेंसलो,जोगणी का पहाड,अश्वश्थामां का डुंगर,लक्ष्मण टेकरी,दातार पर्वत हैं।
गिरनार वनविभाग नाका। Girnar vanvibhag naka: वनविभाग ने गिरनार के चारो और नाके बनाये हैं वो इस तरह हैं-कालवा,पाज,दौलतपरा,जाबंडी,पातुराण,पाटवड,रणशीवाव,काळा गडबा,डुंगरपुर,पादरीया,तोरणीया,बिलखा,लामडीधार और रामनाथ मुख्य हैं।
गिरनार की नदीयां। Girnar ki nadiya :
सोनरख,गुडाजली,लोल,हेमाजली,ढेढीयो,वोकळो,काळवा वोकळो और दुसरी छोटी नदीयां गिरनार से निकलती हैं।
गिरनार के जलाशय :भवनाथ तलहटी,विलिंग्डन डेम,हसनापुर डेम,और खोडीयार मुख्य हैं।
गिरनार की विशेष जगह। Girnar ki vishesh jagah : गिरनार की चारो और सुंदर जगहें हैं जिसमे मुख्य, वेलावन,माळवेलो,पोलो आंबो,सातपुडा,झिणाबावा नी मढी,जाम्बुवान गुफा,बोरदेवी,इटवा,चामुद्री,खोडीयार,फाटेल खोडीयार वगेरा मुख्य जगह।
गिरनार पर्वत के स्थल। Girnar parvat ke sthal : रोकडीया हनुमान,पांडव डेरी,वालु आंबली,धोळी डेरी,काली डेरी,भरथरी गुफा,माळी परब,कोट,नेमिनाथ मंदिर,जगमाल गोरधन का डेरा,अमिझरा पार्श्वनाथ,अदबदजी,मेरकळशी,सताराम सोनी की टुंक,मानसंग भोजराज की टुंक,सूर्यकुंड,राणकदेवी का महल,कुमारपाल की टुंक,नंदिश्वर,वस्तुपाल-तेजपाल मंदिर,संप्रति राजा का टुंक,श्री चंद्रप्रभु,हाथीकुंड,श्री शांतिनाथजी,राजुल गुफा,दिगंबरी मंदिर,भिमकुंड,सातपुडा,जटाशंकरी धर्मशाला,गौमुखी गंगा,सेवनदासनजि की जगह,भैरव जप,शेषावन,भरतवन,हनुमान धारा,सीतामढी,साचाकाका,शेषशायी भगवान,अम्बाजी, गुरु गोरखनाथ,औघड,कमंडल कुंड,पांडव गुफा,अनसुया,कालिका,गुरु दत्तात्रेय,गब्बर,
गिरनार की खास जगह। Girnar ki khas jagah:
भवनाथ,दामोदर कुंड,मुचकदेश्वर,रेवति कुंड,वाघेश्वरी,वामनेश्वर,लक्ष्मण टेकरी,वस्त्रापथ क्षेत्र,गायत्री शक्तिपिठ,इन्द्रेश्वर,आत्मेश्वर,रामेश्वर,महिला शक्तिधाम,दातार,

गिरनार कैसें पहुचे। How to reach Girnar
गिरनार पहुचने के लिए आपको जुनागढ शहर को ध्यान मे रखना पडेगा क्योकी गिरनार पर्वत जुनागढ शहर से 4km दुरी पर स्थित हैं।

हवाई मार्ग से कैसे पहुचे :
जूनागढ़ का अपना हवाई अड्डा नहीं है और निकटतम हवाई अड्डा राजकोट,पोरबंदर और केशोद हवाई अड्डे हैं। राजकोट और पोरबंदर हवाई अड्डों पर मुंबई से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। जूनागढ़ पहुंचने के लिए हवाई अड्डों के बाहर से टैक्सिया या बसों द्वारा आप जुनागढ पहुच सकते हैं।
राजकोट हवाई अड्डा 103km
पोरबंदर हवाई अड्डा 113km
केशोद हवाई अड्डा 40km

सड़क मार्ग से कैसे पहुँचे :
नियमित बस सेवा से जूनागढ़ गुजरात के अन्य स्थानों से जुड़ा हुआ है जैसे अहमदाबाद, भुज, भावनगर, द्वारका, सोमनाथ,पोरबंदर और राजकोट,वडोदरा,सुरत,मुंबई इन शहरों से जूनागढ़ पहुचने के लिए निजी और GSRTC वाली दोनों तरह की बसें कार्यरत हैं।

रेल मार्ग से कैसे पहुँचे :
जूनागढ़ जंक्शन स्टेशन, जो शहर के केंद्र से लगभग 1 किमी दूर स्थित है,मुंबई,राजकोट,अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम,पुणे और जबलपुर जैसे स्थानों से ट्रेन सेवा उपलब्ध है।

                दोस्तो,अगर आप पर्यटन के शौखीन है,शिवभक्त हैं,जैनधर्मी है,हिंदु संस्कृति के चाहने वाले हैं या सौराष्ट्र के लोगो के बारे मे जानना चाहते हैं तो,साहब एक बार आप गिरनार जरुर जाये। दोस्तो,आशा रखता हु यह कुछ जानकारी आपको पसंद आयी होगी,साथ ही कामना करता हु आपकी यात्रा आनंदमय,मंगलमय हो।आप जहा भी यात्रा करे पर्यावरण का,स्वच्छता का ध्यान रखे और वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सन्मान जरुर करें।

(वास्तविक यात्रा और स्थानिक लोगो जैसे,स्थानिक दुकानदार,स्थानिक गाईड,स्थानिक पर्यटक से मीली जानकारी के आधार पर।अगर इस आर्टिकल मे कही कोई भुल,क्षति,गलती हो तो कोमेंट के जरीए जरुर मेरा मार्गदर्शन करें। धन्यवाद...।)
                      ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

'ट्रावेल टिचर' ब्लॉग का समर्थन करें, वेबसाइट को चालू रखने में मेरी सहायता करें। आपकी एक छोटी सी मदद मुजे भारत के बेहतरीन पर्यटन स्थल और हिंदु, बौद्ध, जैन, शीख जैसे धर्मो के धार्मिक स्थल की महत्वपुर्ण जानकारी ब्लॉग के माध्यम से दुनिया के सामने रखने के लिए उत्साहित करेगी। आपका स्वैच्छिक योगदान मेरे ब्लॉग को जारी रखने में और भारत देश का त्याग,बलिदान,समर्पण,शौर्य,पराक्रम,विरता वाला गौरवपुर्ण इतिहास पर्यटन जानकारी के द्वारा दुनिया के सामने रखने में सहायक साबित हो सकता हैं।  कृपया उस राशि का भुगतान करें जिसके साथ आप सहज हैं; ₹10 से लेकर ₹10000 तक कुछ भी भुगतान कर सकते हैं।

Pay with PayPal
नोट: ब्लॉग-वेबसाइट को चालू रखने के लिए मुजे पैसे खर्च करने पड़ते हैं, यदि आप गुणवत्ता और मेरें प्रयासों से संतुष्ट हैं तभी मेरी सहायता के लिए विचार करें। हम आपसे
स्वैच्छा से भुगतान करने के लिए कह रहे हैं जो आपने
पहले ही पढ़ा हैं। हालाँकि यह कोई दान नहीं है,कृपया ध्यान दें कि आपको कर कटौती नहीं होगी जैसा कि दान के साथ होता है। आपके विचार करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।             

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ