गिरनार शिवरात्रि मेला।जूनागढ शिवरात्रि मेला।गिरनार परिक्रमा।लीली परिक्रमा।Girnar Shivratri Mela।Junagadh Shivratri Mela।Girnar Parikrama।Lili Parikrama।Travel Teacher


भगवा और भस्म के दिवाने गढ गिरनार वाले।

                        नमस्कार दोस्तो,कुछ लोग होंगे जिन्होने शायद गिरनार के बारे ना सुना हो,अगर आप गिरनार के बारे नहि जानते हैं तो कुछ जानकारी आपको इस पोस्ट से जरुर मिल जायेगी। दोस्तो,गिरनार और गिरनार के आसपास पर्यटन भरा पडा हुआ हैं।एक पर्यटक के लिए यहा सुंदर नजारें के साथ साथ वास्तुकला,ऐतिहासिक स्थान,धार्मिक स्थान,प्रकृति,आयुर्वेद,भजन-किर्तन,लोककला,हस्तकला वगेरा वगेरा बहुत कुछ हैं।गिरनार एक बडा विशाल पहाड है,जिसकी उंचाई समुद्र सतह से 3000 feet से ज्यादा है।और तकरिबन 45075 Acre के क्षेत्र मे फैला हुआ है।अब आप गिरनार के कुदरती नजारे और सोंदर्य के बारे अंदाजा लगा सकते हैं।
                        जुनागढ शहर की पूर्व मे वाघेश्वरी द्वार से तकरीबन 4km दुर गिरनार पर्वत हैं।गिरनार गिरिमाला की शुरुआत शहर के किले से तुरंत होती है।वैसे तो गिरनार पहाड़ियों का एक समूह है, जिसे गिरनार गढ या गिरनार पर्वत के नाम से जाना जाता है। गिरनार का उल्लेख वेदों,पुराणे के साथ-साथ कई सभ्यता के लेखों में भी मिलता है। गिरनार पे चढाई की शुरुआत 'भवनाथ' तलहटी से होती हैं और गुरु दत्तात्रेय शिखर पर खतम होती हैं।जहा गुरु दत्तात्रेय के चरणो के निशान वाला छोटा सा मंदिर है।गुरु दत्तात्रेय शिखर की उंचाई समुद्र सतह से 3300 feet मानी जाती हैं। दोस्तो,यात्रालु,श्रद्धालु या पर्यटक पवित्र गिरनार पे चढाई की शुरुआत भवनाथ मंदिर मे समस्त ब्रम्हांड को धारण करने वाले भगवान भवनाथ(शिव) के दर्शन के बाद शुरु करते हैं। पवित्र गिरनार की चढाइ के लिए आपको 9999 सिढीयां चढनी होगी। वैसे तो गिरनार एक आध्यात्मिक स्थान हैं,यह दिगंबर या नागा साधु,नाथपंथी,जैन धर्मी,शिव भक्त,सनातन धर्म के साधु संत,योगी,मुनी,औषधी और जंगल के लिए विशेष जाना जाता है।यहा पर अघोरी साधु संतो का विशेष आकर्षण है।भवनाथ की तलहटी मे आपको बहोत सारे धुना जलते दिखाई देंगे जहा शरीर पर भस्म लपेटे यौगिक क्रिया मे मस्त,बाहरी दुनिया से ना कोइ लेना-देना,बस अपने आप मे शिव को देखने की सफल कोशीश करते कइ साधु-संत दिखाइ देंगे।यह द्रश्य कोइ कुभ मेले से कम नहि होता हैं।
गिरनार परिक्रमा का मेला।लीली परिक्रमा।Girnar Parikrama ka mela।Lili parikrama
पवित्र गिरनार मे साल मे दो बडे मेले लगते है,और दोनो ही मेलो का सिर्फ बडा ही नहि साहब "बहुत बहुत बडा " महत्व हैं।पहला मेला गिरनार परिक्रमा मेला हैं जिसे लीली परिक्रमा से भी जाना जाता है,जो पुरे गिरनार के आसपास लगता है,इस मेले मे पवित्र गिरनार की परिक्रमा की जाती है,जो लगभग 36 km की होती है।यह परिक्रमा मेला कार्तिकी सुद एकादशी से शुरु होकर कार्तिकी सुद पूर्णिमां तक चलता हैं। एसा माना जाता हैं पवित्र गिरनार मे तैंतिस करोड देवी-देवता बसे हैं और पवित्र गिरनार की परिक्रमा करने से सभी तैंतिस करोड देवी-देवता की परिक्रमा हो जाती हैं।इस परिक्रमा मे भारतवर्ष से आये लाखो श्रद्धालु भक्त हिस्सा लेते है। यह परिक्रमा भवनाथ तलहटी मे झिणाबावा मढी से शुरु होकर सरकाडिया, मालवेला और बोरदेवी से गुजरते हुए पांचवें दिन फिर से झिणाबावा मढ़ी आकर खत्म होती हैं।'सरखड़िया हनुमान' गिरनार का बहुत अच्छा हनुमान मंदिर है,यह घनघोर जंगल के बीच स्थित है। हिरण  देखने मिलने की संभावना यह जगह पर अधिकतम हैं और शेरों की दहाड़ एक सामान्य सी बात हैं।
गिरनार शिवरात्रि का मेला।Girnar Shivratri ka mela
दोस्तो,यह मेला भी पाँच दिन तक चलता हैं।इस मेले के शुरुआत महा वद नवमी से शुरु होकर शिवरात्रि तक चलता हैं। परिक्रमा मेला गिरनार के चारो तरफा लगता हैं जबकी यह मेला गिरनार की तलहटी भवनाथ मे लगता हैं।यह मेले मे ज्यादा श्रद्धालु भक्त हिस्सा लेते हैं।यह मेले की रोनक तो आप खुद शिवरात्रि मे यहा आकर ही यमझ सकते हैं।पाँच दिन तक बडा धार्मिक माहोल बना रहता हैं।इस शिवरात्रि के मेले भी आपको खाने-पीने,रुकने,ठहरने की कोइ दिक्कत नहि होती हैं।संतवाणी,संत्संग,भजन,लोक नाटक भवाई जैसे मनोरंजन की पाँच दिन तक भरमार रहती हैं। इस मेले मे आपको जाने-अनजाने कइ सिद्ध पुरुष,संत और दिव्य आत्माओ के दर्शन मिलते रहते हैं,जिन्हे हम संसारी लोग नहि समझ पाते। शिवरात्रि मे मध्यरात्रि को नागा साधुओ का बहुत बडा जुलुस निकलता हैं।यह नागा साधु का जुलुस भवनाथ मंदिर से शुरु होकर मृगी कुंड तक चलता हैं,जहा सब नागा साधु मृगी कुंड मे डुबकी लगाते हैं।यह माना जाता हैं की,यह जुलुस मे स्वयं भगवान शंकर और उनके गण भी साधु के रुप मे हिस्सा लेते है,दुसरी बात यह हैं की डुबकी लगाने वाले साधु-संत मे से सभी वापस नहि आते कइ साधु संत मृगी कुंड मे ही रह जाते हैं।यह जुलुस के दौरान इतनी ऊंची आवाज मे एक सुर मे "हर हर महादेव" का जयकारा होता है की मानो अगर भगवान शंकर भी ध्यान मे हो तो ध्यान से जाग जाये।यह जुलुस के दौरान ही नागा साधु धर्म की रक्षा के लिए अपने गुरु से प्राप्त अलग अलग शस्त्र विद्या दिखाते हैं जो किसी मार्शल आर्ट से कम नहि होती हैं।यह नागा साधु ओ का जुलुस शिवरात्रि का मुख्य आकर्षण हैं।
                         अलग अलग जाति और समुदाय के लोग इन दोनो पवित्र मेले मे एक साथ आते हैं इसलिए सामाजिक तौर पर भी बहूत महत्वपुर्ण हैं। यह मेले मे प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के दूसरे लोगों के साथ रहता है। गिरनार के इस दोनो मेलो मे आपको थोडे थोडे अंतर पर चाय,जलपान,खाना खिलाने वाले पंडाल लगे हुए मिलते हैं,जो सेवाभावी संस्थाए या सेवाश्रमो द्वारा लगाये जाते है।मतलब खाने-पीने की आपको पुरी मेले के दौरान बिलकुल भी चिंता करने की जरुरत नहि होती हैं।और वो भी बढीया क्वोलिटी वाला,फाईव स्टार होटल का खाना भी इस प्रसाद के आगे कुछ नहि हैं।भंडारे वाले पंडाल के सामने बडी उंची आवाज मे खाना खिलाने के लिए गुजराती मे आवाजें लगी रहती हैं " हरीहर करी ल्यो,हरीहर करी ल्यो " मतलब प्रसाद ग्रहण कर लो।जुनागढ शहर प्रसाशन,वन विभाग और पुलिस इन तीनो का काम बडा सराहनीय होता हैं।पुलिस सीसीटीवी और खडे पाँव,वन विभाग जंगली हिसंक पशुओ की निगरानी कर के,जुनागढ शहर प्रसाशन बढीया इंतजाम कर के गिरनार के इन दोनो मेलो को सफल बनाते हैं।आपको थोडी थोडी दुरी पर पंडालो मे(स्थानीक लोगो से "ऊतारा या ऊतारो " एसा सुनाइ देगा)भजन,सत्संग,कथा,नाटक,भवाई वगेरा का भी भव्य मनोरंजन मिलता हैं।आपको चलते,उठते-बैठते,घुमते-फिरते,सोते "जय गिरनारी,जय गिरनारी" या फिर "हर हर महादेव" के नारे या उंची आवाजें सुनाई देगी,क्योकी पुरा माहोल भक्तिमय के साथ भगवान शंकर मे डुबा हुआ रहता हैं।आपको एसा लग सकता हैं की आप गुजरात के जुनागढ मे नहि किंतु भगवान शंकर के किसी लोक मे मौजुद हैं।ज्यादातर आपको भगवा लपेटे और भस्म के शृंगार वाले साधु-संत के साथ साथ कइ व्यक्ति भी दिखाइ देंगे।अगर आप सिर्फ एक सैलानी के तौर पर यहां जाना चाहते हैं, तब भी आपको निराशा नहीं होगी। गिर के जंगल दुनियाभर में अपनी साख रखते हैं। प्रकृति के बिच का यह अनुभव आपको सिमेंट-कोंक्रिट वाले जंगल से कई गुना फायदा पहुचता हैं।गिरनार,गिरनार की तलहटी,गिरनार की गिरिमाला,गिरनार की तलहटी मे बसा जुनागढ शहर इन सभी जगहो पे देखने और घुमने लायक बहुत सी जगहें हैं,जिसकी बात विवरण के साथ अगले आर्टिकल करेंगे।
गिरनार कैसें पहुचे।How to reach Girnar
गिरनार पहुचने के लिए आपको जुनागढ शहर को ध्यान मे रखना पडेगा क्योकी गिरनार पर्वत जुनागढ शहर से 4km दुरी पर स्थित हैं।
हवाई मार्ग से कैसे पहुचे :
जूनागढ़ का अपना हवाई अड्डा नहीं है और निकटतम हवाई अड्डा राजकोट,पोरबंदर और केशोद हवाई अड्डे हैं। राजकोट और पोरबंदर हवाई अड्डों पर मुंबई से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। जूनागढ़ पहुंचने के लिए हवाई अड्डों के बाहर से टैक्सिया या बसों द्वारा आप जुनागढ पहुच सकते हैं।
राजकोट हवाई अड्डा 103km
पोरबंदर हवाई अड्डा 113km
केशोद हवाई अड्डा 40km
सड़क मार्ग से कैसे पहुँचे :
नियमित बस सेवा से जूनागढ़ गुजरात के अन्य स्थानों से जुड़ा हुआ है जैसे अहमदाबाद, भुज, भावनगर, द्वारका, सोमनाथ,पोरबंदर और राजकोट,वडोदरा,सुरत,मुंबई इन शहरों से जूनागढ़ पहुचने के लिए निजी और GSRTC वाली दोनों तरह की बसें कार्यरत हैं।
रेल मार्ग से कैसे पहुँचे :
जूनागढ़ जंक्शन स्टेशन, जो शहर के केंद्र से लगभग 1 किमी दूर स्थित है,मुंबई,राजकोट,अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम,पुणे और जबलपुर जैसे स्थानों से ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
                        दोस्तो,यह सिर्फ गिरनार और गिरनार मे लगने वाले परिक्रमा और शिवरात्रि मेले की कुछ जानकारी हैं।इस के अलावा भी बहुत कुछ है गिरनार मे जिसके बारे हम अगले आर्टिकल मे बात करेंगे। यहा पर एक बात पक्की हैं,'गिरनार मे कुछ समय बिता कर ही आप सनातन हिन्दु धर्म की प्रारंभीक जानकारी का अनुभव कर सकते हैं। जब आप गिरनार मे होंगे तब मानो आप शिव परिवार या नवनाथ, सिद्ध चौरासी या फिर किसी पवित्र आत्मा के सामिप्य मे हो एसा महसुस कर सकते हो।अगर आप पर्यटन के शौखीन है,शिवभक्त हैं,जैनधर्मी है,हिंदु संस्कृति के चाहने वाले हैं या सौराष्ट्र के लोगो के बारे मे जानना चाहते हैं तो,साहब एक बार आप शिवरात्रि के या परिक्रमा मेले मे जरुर जाये।दोस्तो,आशा रखता हु यह कुछ जानकारी आपको पसंद आयी होगी,साथ ही कामना करता हु आपकी यात्रा आनंदमय,मंगलमय हो।आप जहा भी यात्रा करे पर्यावरण का,स्वच्छता का ध्यान रखे और वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सन्मान जरुर करें।

                        ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

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2 टिप्पणियाँ

  1. आपके इस पोस्ट में सभी जानकारी दी गई हैं लेकिन फॉन्ट छोटा होने के कारण पुरा पढ़ने में परेशानी हुई

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    1. जी, जरुर मै कोशीश करुंगा की आपको पढनें मे आसानी हो। बहूत धन्यवाद।

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