द्वारका यात्रा धाम की जानकारी। द्वारका पर्यटन स्थल की जानकारी। Dwarka Yatra dham ki jankari। Dwarka Paryatan Sthal ki jankari। Travel Teacher

गुजरात मे द्वारका नगरी आपको सबसे आध्यात्मिक और पवित्र वातावरण प्रदान करती है। द्वारका नगरी भव्य मंदिरों,अद्भुत वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व से परिपूर्ण और समुद्र के किनारे एक अतिरिक्त पर्यटक आकर्षण वाला स्थल हैं। द्वारका नगरी एकमात्र ऐसा धार्मिक स्थल है,जो हिंदू धर्म में वर्णित हैं चार धाम और सप्त पुरि दोनो मे गीनती की जाती है। इस कारण से यह एक हिंदुओ का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और पूरे साल भर देश और दुनिया से हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। दोस्तो,यह सातवीं द्वारका हैं,इस से पहले छह् द्वारका समुद्र मे समा चुकी हैं। पुरातात्विक संशोधन के अनुसार भगवान श्री क्रिष्णा की सोने के नगरी द्वारका अभी भी समुद्र की गहराई मे हैं। आज वर्तमान द्वारका अरब सागर पर गोमती नदी के किनारे बसी हुइ है और उल्लेखनीय ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के अलावा द्वारकाधीश जगत मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। हर साल जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान दुनिया भर से हजारों भक्त यहां विशेस उत्सव में भाग लेने के लिए आते हैं। द्वारका आज भी कृष्ण भक्तों सहित हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिये एक महान तीर्थ है। आइए जानते हैं भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका स्थित उनके धाम के बारे में।

मथुरा छोड़ने के बाद अपने परिजनों एवं यादव वंश की रक्षा करने हेतु भगवान श्री कृष्ण ने भाई बलराम तथा अन्य यादववंशियों के साथ द्वारकापुरी नगरी बसाई थी।जिसका निर्माण देवो के रत्नाकार एवं वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा ने कीया था। यादव वंश की समाप्ति और भगवान श्रीकृष्ण की जीवनलीला पूर्ण होते ही द्वारका नगरी को समुद्र ने अपने आप मे समा लिया था। वर्तमान में स्थित द्वारका, गोमती द्वारका के नाम से जानी जाती है। द्वारका का मतलब 'द्वारा + का' जिस मे 'का' यानी ब्रम्ह मतलब ब्रवम्ह का द्वार या ब्रम्ह द्वार। द्वारका जिसे हिंदु शास्त्रो मे 'द्वारवती' के नाम से भी जाना जाता है।कई द्वारों का शहर होने के कारण द्वारिका इसका नाम पड़ा। इस शहर के चारों ओर बहुत ही लंबी दीवार थी जिसमें कई द्वार थे। वह दीवार आज भी समुद्र के तल में स्थित है।

गोमती द्वारका । Gomati Dwarka
वर्तमान में गोमती द्वारका और बेट द्वारका एक ही द्वारकापुरी के दो भाग हैं। गोमती द्वारका से ही भगवान श्री क्रिष्णा राज्य का कामकाज संभालते थे। गोमती द्वारका में ही भगवान श्री क्रिष्णा का मुख्य मंदिर 'जगत मंदिर' है। जो श्री रणछोड़राय मंदिर या द्वारकाधीश मंदिर के नाम से भी मशहूर है। यह मंदिर लगभग 1500 साल पुराना सात मंजिला वाला मंदिर है। आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार के लिए जगदगुरु आदि शंकराचार्य ने द्वारकापीठ की स्थापना करके यह द्वारका नगरी का निर्माण कीया था। गोमती नदी के किनारे बसा यह मंदिर के कई घाट हैं,जिस मे मुख्य संगम घाट हैं। इस द्वारकाधीस या रणछोडराय मंदिर में भगवान की काले रंग की चार भुजाओं वाली मूर्ति है। इसके अलावा मंदिर के अलग-अलग हिस्सो में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर एवं मूर्तियां स्थित है।मंदिर के दक्षिण विभाग में आदि जगदगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित 'शारदा मठ' भी है।

बेट द्वारका। Bet Dwarka
बेट यानी टापु,गुजराती मे टापु को 'बेट' बोलते है। शायद इसि लिए यह द्वारका को बेट द्वारका के नाम से जाना जाता हैं। बेट द्वारका गोमती द्वारका से 35km दुरी पर ओखा नामक बंदर के पास हैं,जिस मे 30km तक यानी ओखा तक सडक मार्ग हैं और 5km का ओखा से बेट द्वारका तक समुद्री मार्ग हैं। बेट द्वारका मुल रुप से भगवान श्री क्रिष्णा का निवासस्थान था,जहा अपने परिवार कुटुंब के सदस्यो के साथ निवास करते थे।यह मंदिर का निर्माण 500 साल पहले महाप्रभु संत वल्‍लभाचार्य ने करवाया था एसा माना जाता हैं। मंदिर में मौजूद भगवान द्वारकाधीश की मुर्ति के बारे में बताया जाता है कि इसे रानी रुक्मिणीजी ने स्‍वयं अपने हाथो से तैयार किया था।बेट द्वारका के दुसरे नामरमणद्वीप यानी रमणीय द्वीप, कृष्ण विलास नगरी अर्थात कृष्ण की आमोद नगरी, कलारकोट। पर्यटन के लिहाज से यह राज्य का एक मुख्य स्पोट है जो डॉल्फिन प्वाइंट, समुद्री भ्रमण, कैम्पिंग और पिकनिक स्पार्ट के रूप में काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा यह द्वीप पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है।
बेट द्वारका मे चावल का महत्व और सुदामां-क्रिष्णा की कथा।
पौराणिक कहानी के अनुसार भगवान श्री क्रिष्णा के ब्राम्हण भक्त सुदामा थे।शिक्षा काल मे सांदिपनी मुनी के आश्रम मे दोनो ने साथ मे शिक्षा ग्रहण करी थी।सांदिपणी आश्रम मे कामचोर भगवान श्री क्रिष्णा बांस की बंसरी बजाया करते थे और उनका सारा काम जैसे,आश्रम के लिए लकडी काटना,लकडी इकठ्ठा करना,लकडी ले जााना वगेरा काम सुदामा करते थे।बाद मे जब,अपने अपने सामाजीक जिवन मे व्यस्त हो गये तब सुदामा बडी गरीबी मे दिन गुजार रहे थे।गरीबी से तंग सुदामा की पत्नी से रहा नहि गया ओर सुदामां को बोला" तुम्हारा दोस्त सोने की द्वारका नगरी का मालिक अच्छी जाहोजलाली वाला जिवन व्यतित कर रहा हैं,उनके पास जाओ और अपना जिवन निर्वाह ठिक से चले इस लिए कुछ मदद लेकर आओ"। सुदामा अपनी बिवी की जीद के आगे बेबश थे और चल पडे द्वारका की और। भगवान श्री क्रिष्णा को पहरेदार ने बताया 'कोई सुदामा नामक गरीब ब्राह्मण भिखारी आपको अपना दोस्त बोल रहा हैं और बहुत प्रयास करने पर भी वापस नही जा रहा' इतना सुनते ही पुरे ब्रम्हाण्ड के मालिक भगवान श्री क्रिष्णा साक्षात लक्ष्मिजी-रुकमणी को अकेला छोड सुदामां की तरफ दौडे।(इस दौड का वर्णन मेरा जैसा सामान्य आदमी नहि कर सकेगा,शास्त्रो मे इस दौड का वर्णन विस्तार से कीया गया हैं।)भगवान श्री क्रिष्णा खुद सुदामां के हाथ-पैर साफ कर के सभी प्रकार की सेवा करते हैं। सुदामां को रास्ते मे खाने के लिए बिवी ने जो तांदुल यानी पौहा दिये थे,वो बासी-बिगडा तांदुल यानी पौहा भगवान श्री क्रिष्णा को भेट स्वरुप दीया।और उस समय भगवान श्री क्रिष्णा रानी रुकमणी और छप्पन भोग को अनदेखा कर सिर्फ और सिर्फ सुदामां का बांसी-बिगडा पौंहा खुशी-खुशी खाया। यह द्रश्य इतना प्रेम भरा था की स्वंयम मां लक्ष्मी का अवतार रानी रुकमणीजी भी जलने लगी थी।सुदामां ने जिवनभर 'किसी से कुछ नही मांगना' यानी 'अयाचक व्रत' लिया था।अपने दोस्त के पास जिस उद्देश से आये थे,उस विषय मे बिना बताये सुदामां द्वारका से बिदा होते हैं।अपने नगर आकर सोचते है बिवी को क्या कहेंगे,क्या जवाब देंगे,अपने दोस्त के पास से तो कुछ लाये नहि।एेसे सोच विचार और मनोमंथन उनके मन मे चलता है,उनको अब उनका घर भी नही मील रहा है..., मिलेगा कैसे दोस्तो? जो झौपडी थी वो अब महेल बन गया था,बिवी सोलह शणगार सजे रानी बन गई थी।सुदामां खुद अपनी बिवी को पहचान नहि पाये।एसा हो सकता हैं 'संपूर्ण ब्रम्हाण्ड के मालिक को जब बताया जायेगा तभी वो जानेंगे? बिलकुल नही,वो अंतरयामी कण कण का खयाल रखने वाला वो अपने मित्र,अपने भक्त की मन की बात नही समझ पायेगा। इसी घटना से प्ररीत यहा चावल,पौहा के दान की परंपरा हैं। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु एक धार्मिक परंपरा की तरह ब्राह्मणों को चावल दान में देते Mandi

द्वारका के दर्शनीय स्थल। Popular places in Dwarka
1.जगत मंदिर।Jagat Mandir श्री रणछोडराय मंदिर।Shri Ranchhodray Mandir द्वारकाधीस मंदिर। Dwarkadhish Mandir
2.गोमती घाट।Gomati ghat
3.नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर।Nageshwar Jyotirling Mandir
4.बेट द्वारका।Bet Dwarka
5.द्वारका बिच।Dwarka beach
6.रुकमणीजी मंदिर।Rukmaniji Mandir
7. लाईट हाउस।Light house
8.गोपी तलाव।Gopi talav
9.भडकेश्वर महादेव मंदिर।Bhadkeshwar Mahadev Mandir
10.गिता मंदिर।Geeta Mandir
11.सुदामा सेतु।Sudama Setu
12.ईस्कोन मंदिर।Iskon Mandir
13.स्वामि नारायण मंदिर।Swaminarayan Mandir
14.डनी पोंईट।Danni point
15.समुद्र नारायण मंदिर।Samudra Narayan Mandir
16.शंख तालाब।Shankh Tatab
और दुसरे भी कई अन्य मंदिर जैसे शारदा मठ,हनुमान मंदिर,कुशेश्वर मंदिर,दुर्वासा और त्रिविक्रम मंदिर,चक्र तिर्थ,कैलाश कुंड वगेरा..

Dwarka Darshan and Aarti Timing :
दर्शन का समय। Darshan Timing
सुबह 6:30 से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम के 5:00 बजे से रात के 9:30 बजे तक
Morning 6.30 to Afternoon 13.00
and Evening 5.00 to 9.30
सुबह के समय की आरती। Aarti Morning Timings 
6.30 मंगला आरती।Mangla Arti
7.00 to 8.00 मंगला दर्शन।Mangla Darshan
8.00 to 9.00 अभिषेक पूजा(स्नान विधी)Abhishek Pooja [Snan Vidhi]:
दर्शन बंद।Darshan Closed
9.00 to 9.30 शृंगार दर्शन।Shringar Darshan
9.30 to 9.45 स्नान भोग।Snanbhog :
दर्शन बंद।Darshan Closed
9.45 to 10.15 शृंगार दर्शन।Shringar Darshan
10.15 to 10.30 शृंगार भोग।Shringarbhog:
दर्शन बंद।Darshan Closed
10.30 to 10.45 शृंगार आरती।Shringar Arti
11.05 to 11.20 गवाल भोग।Gwal Bhog:
दर्शन बंद।Darshan Closed
11.20 to 12.00 दर्शन।Darshan
12.00 to 12.20 राजभोग।Rajbhog:
दर्शन बंद।Darshan Closed
12.20 to 12.30 दर्शन।Darshan
13.00 अनोसर।Anosar
दर्शन बंद।Darshan Closed
शाम के समय की आरती। Evening Timings Aarti
5.00 उथप्पन प्रथम दर्शन।Uthappan First Darshan
5.30 to 5.45 उथप्पन भोग।Uthappan Bhog
दर्शन बंद।Darshan Closed
5.45 to 7.15 दर्शन।Darshan
7.15 to 7.30 संध्या भोग।Sandhya Bhog
दर्शन बंद।Darshan Closed
7.30 to 7.45 संध्या आरती।Sandhya Arti
8.00 to 8.10 शयंग भोग।Shayanbhog
दर्शन बंद।Darshan Closed
8.10 to 8.30 दर्शन।Darshan
8.30 to 8.35 शयन आरती।Shayan Arti
8.35 to 9.00 दर्शन।Darshan
9.00 to 9.20 बंटा भोग और शयन।Bantabhog and Shayan
दर्शन बंद।Darshan Closed
9.20 to 9.30 दर्शन।Darshan
9.30 दर्शन ।Darshan
मंदिर बंद।Mandir Closed

द्वारका कैसे पहुंचें। How to reach Dwarka
हवाई मार्ग से : सबसे नजदिकी हवाई अड्डा जामनगर एयरपोर्ट हैं जो लगभग 130km पडता हैं। फिर वहा से आप बस या टेक्षी द्वारा आप द्वारका पहुच सकते हो।
सड़क मार्ग से: द्वारका जामनगर-द्वारका जाडने वाला राज्य राजमार्ग पर लगभग 130km पर है। गुजरात के सभी बडे शहर अहमदाबाद,वडोदरा,सुरत,राजकोट,भुज,जामनगर,पोरबंदर,जुनागढ,अमरेली,भावनगर जैसे शहरो से सरकारी और प्राइवेट बसे उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग से: द्वारका अहमदाबाद-ओखा ब्रॉड गेज रेलवे लाइन पर एक स्टेशन है,और लगभग सभी ट्रेनो का स्टोपेज हैं।अहमदाबाद,वडोदरा,सुरत,मुंबई,गोवा,कर्नाटक,केरल तक ट्रेने जुडी हुई हैं।
                           ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

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