कुबेर भंडारी करनाली।Kuber Bhandari Karnali।Travel Teacher

नमस्कार दोस्तो,
जहा से मां नर्मदा का उदगम होता हैं और जहा मां नर्मदा समुद्र मे मिलती हैं,अमरकंटक से लेकर भाडभुज तक मां नर्मदा के किनारे कई पवित्र यात्रा स्थल हैं और आज हम एसे ही एक त्रेतायुग के पौराणिक मंदिर के बारे मे बात करेंगे,जो बहुत ही चमत्कारीक हैं। दोस्तो, वह मंदिर देवो के देव महादेव,कालो के काल महाकाल,भगवान शंकर को समर्पित 'कुबेर भंडारी' हैं। त्रिवेणी संगम पर स्थित मां नर्मदा के किनारे बसा यह कुबेर भंडारी मंदिर श्रद्धालुओ मे काफी आकर्षण जमाये बैठा हैं। वैसे तो हर दिन यहा भीडभाड लगी रहती हैं  पर हर अमावस्या को श्रद्धालु यहा बडी मात्रा मे आते हैं और यहा बडा मेला लगता हैं। हर अमावस्या को यहा लगभग पॉच लाख से ज्यादा श्रद्धालु,दर्शनार्थी,शिवभक्त दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए आते हैं। आने वाले यात्रीओ के लिए यहा निशुल्क भोजन की उत्तम व्यवस्था हैं और तकरीबन एक लाख से भी ज्यादा यात्री प्रसाद के रुप मे भोजन ग्रहण करते हैं। साथ ही यहा पार्किंग और शौचालय की व्यवस्था भी उत्तम हैं।भाजपा के सांसद स्वर्गिय अरुण जेटली साहब ने अपने कार्यकाल के दौरान यह गाँव दत्तक लिया था और उनके स्वर्गवास के बाद उनका अस्थि विसर्जन भी यहा पवित्र धाम कुबेर भंडारी मे कीया गया था।गुजरात,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,राजस्थान और भी कई जगह से दिन-प्रतिदिन यहा दर्शनार्थी आते रहते हैं। मानो यहा कुबेर भंडारी से कुछ लेकर जाने की जीद पुरी होती हो। प्राकृतिक सौदंर्य वाला यह  पौराणिक स्थल,त्रेतायुग और देवो के खजानची यक्षराज कुबेर की तपस्या से जुडा हुआ है। बहुत ही चमत्कारीक ये मंदिर शिवभक्तो और पर्यटको मे बहुत ही प्रसिध्धी पा चुका हैं।

कुबेर भंडारी नाम कैसे पडा।Kuber Bhandari Naam Kaise Pada
दोस्तो,त्रेतायुग मे रावण के द्वारा लंका का राजपाट और पुष्पक विमान छीन जाने के बाद,रावण के सोतेले भाई और देवो के खजानची यक्षराज कुबेर ने नारदजी के आदेश पर यह जगह पर भगवान शिव का तप कीया था। और यह जगह पर ही भगवान शिव से विशेष आशिर्वाद प्राप्त कर,देवो के खजानची बनने का पद प्राप्त करा था। यह जगह पर ही संपूर्ण ब्रम्हाण्ड के कर्ता,हर्ता,भर्ता देवो के देव महादेव भगवान शिव ने यक्षराज कुबेर के भंडार भरे रहने के आशिर्वाद दिये थे,इसलिए यह जगह का नाम कुबेर भंडारी पडा। भगवान शिव और माता पार्वती ने
भोजन और पानी के रूप में हमेशा वहाँ रहने का उचित निर्णय लिया। उस समय से वह इस मंदिर में कभी न खत्म होने वाले अन्न, जल, धन के देवता के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं। यह जगह पर मां नर्मदा,ओरसंग और गुप्त सरस्वति का त्रिवेणी संगम भी हैं।

कुबेर भंडारी दर्शनिय स्थल।Kuber Bhandari darshniy Sthal
चांदोद।Chandod
चांदोद यानी "दक्षिण प्रयाग" जो त्रिवेणी संगम माँ नर्मदा, औरसंग, और गुप्त सरस्वती नदी के तट पर स्थित है।त्रिवेणी संगम को हिंदुओं के बीच बहुत पवित्र माना जाता है। यह एक पौराणिक स्थल है और त्रिवेणी स्नान के लिए यह त्रिवेणी संगम उत्तम स्थान माना जाता है। यहा पर तर्पण,मुंडन,पनोती जैसी वैदिक क्रिया होती है। अस्थि विसर्जन और अंतिम संस्कार जैसी विधिया के लिए भी यह स्थल उत्तम माना जाता है। काशी,हरिद्वार,गया, प्रयाग,नासिक, मातृगया सिद्धपुर,रामेश्वरम,जीतना ही धार्मिक महत्व है,चांदोद का।

पोइचा।Poicha
पोइचा एक सुंदर और बड़े क्षेत्र में निर्मित निलकंठधाम स्वामीनारायण मंदिर के लिए प्रसिध्ध है। यह अद्भुत तीर्थस्थल अपने दिव्य अनुभव के लिए पर्यटको को आकर्षित करता है। यह स्थान पर अनुशासन,मानवीय मूल्यों,सौंदर्य, प्रकृति की प्रशंसा और प्रार्थना की शक्ति,पर आपका ध्यान केन्द्रित हुए बिना नही रह सकता। उम्र के सभी वर्गो का पसंदीदा यह स्थल मनोरंजन के साथ पवित्रता,भक्ति जैसे दिव्य गुण भी आपके भितर स्थापित करता है। पर्यटन के लिए बच्चो और युवाओ का फेवरिट है यह स्थान। चांदोद,पोइचा,करनाली ये तीनो स्थल माँ नर्मदा के तट पर भौगोलिक तरीके से एसे बसे जैसे आपको भरपुर मनोरंजन,भक्ति,पवित्रता,उत्साह,सौदंर्य एक साथ दे सके।माँ नर्मदा के तट पर बिलकुल आमने सामने बसे ये तिनो स्थल पर आप एक के बाद एक स्थल पर आसानी से जा सकते है। अगर ये तिनो मे से कोइ भी एक जगह पहेले पहुच गये फिर भी आप दुसरी जगह आसानी से पहुच सकते हो।

कुबेर भंडारी कैसें पहुचे।How to reach Kuber Bhandari

हवाई मार्ग से : सबसे नजदिकी वडोदरा ऐयरपोर्ट हैं,वहा से आप बस सेवा या टेक्षी सेवा का उपयोग कर के कुबेर भंडारी आसानी से पहुच सकते हैं।

रेल मार्ग से : पश्विम रेलवे का वडोदरा रेलवे स्टेशन सबसे नजदिकी बडा रेलवे स्टेशन हैं,वहा से आप बस सेवा या टेक्षी सेवा का उपयोग कर के कुबेर भंडारी आसानी से पहुच सकते हैं।

सडक मार्ग से : वडोदरा,सुरत,अहमदाबाद,राजपिपला जैसे शहरो से कुबेर भंडारी सडक मार्ग से जुडा हैं।

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