भालका तीर्थ,सोमनाथ गुजरात।Bhalka Tirth,Somnath Gujarat।Travel Teacher

हिंदु धर्म से जुडे बहूत पर्यटन स्थल और यात्रा स्थल हमारे देश मे हैं जो, धार्मिक द्रष्टी से बहूत महत्व रखते हैं। दोस्तो,आज हम एसे ही एक धार्मिक एवं पर्यटन स्थल की बात करेंगे जहा संपूर्ण ब्रम्हाण्ड के मालिक,दुनिया को भगवद गिता के माध्यम से कर्म और जिवन का सत्य समझाने वाले भगवान श्री क्रिष्णा ने अपने जिवन के अंतिम क्षण बिता कर अपने देह का त्याग करा था। और वो स्थल हैं "भालका तीर्थ" जो बारह ज्योतिर्लिंग मे प्रथम ज्योतिर्लिंग 'सोमनाथ से केवल 5km की दुरी पर वेरावल के पास स्थित हैं। हिंदुओ की आस्था मे बडा धार्मिक महत्व रखने वाला यह भालका तीर्थ हर साल कई श्रद्धालु और पर्यटको को आकर्षित करता हैं। सोमनाथ से नजदिक हिरण नदी के तट पर स्थित यह भालका तीर्थ मे आज भी, इस संसार के मालिक भगवान श्री क्रिष्णा के चरणो के निशान मौजुद हैं।और द्वापर युग मे जिस पिपल के पेड के निचे बैठ कर पंच तत्व मे विलिन होने का आरंभ कीया था वो पिपल का पेड भी अभी पॉच हजार साल बाद भी हरा-भरा मौजुद हैं। हिंदु सनातन धर्म मे यह भालका तीर्थ 'देहोत्सर्ग तीर्थ' के नाम से पहचाना जाता है। यही वो पवित्र स्थान है जहां सृष्टि के पालनहार भगवान श्री क्रिष्णा ने अपना शरीर त्यागा था।
भालका तीर्थ कथा।Bhalka Tirth Katha
पौराणिक कथाओ के अनुसार भगवान श्री क्रिष्णा कुरुक्षेत्र के पांडवो-कौरवो के युद्ध के बाद और जरासंघ से अपने यादववंश को सुरक्षित रखने के लिए,अपने परिवार,बंधु और यादववंश के साथ मथुरा छोडकर प्रभास क्षेत्र मे समुद्र किनारे द्वारका नगरी बसाकर निवास करने लगते हैं। कुछ सालो बाद यादवो मे आंतरिक कलह बढ गया और पुरा यादववंश अधर्म के रास्ते सवार होकर झगडने लगे और एक दुसरे का नाश करने लगे। भगवान श्री विष्णु के आठवे अवतार के रुप मे भगवान श्री क्रिष्णा को धरती पर रहकर जो भी लीलाये करनी थी वह लीलाये भी पुरी होते देख और वापस वैकुंठ जाने का समय देख भगवान श्री क्रिष्णा द्वारका नगरी छोड सोमनाथ के यह प्रभास क्षेत्र मे आ जाते हैं। भगवान श्री क्रिष्णा विश्राम के समय पिपल के पैड के निचे पैर पर पैर चढाये ध्यानमग्न अवस्था मे बैठे हुए हैं।तभी जंगल मे 'जरा' नामक भील शिकारी को हिरण की आंख चमकती दिखाई देती हैं और वो हिरण का शिकार करने के लिए आंख को निशाना बनाकर बाण चलाता हैं।'जरा' भील ने जिस हिरण की आंख पे निशाना लगाया था दरअसल वो भगवान श्री क्रिष्णा के बांये पैर का पदम था,जो हिरण की आंख की तरह चमकता था।'जरा'भील का बाण भगवान श्री क्रिष्णा को लग जाता हैं,जरा भील पास आकर देखता हैं और भगवान से पछतावे के साथ यह बडी गलती के लिए क्षमा-याचना करता हैं। लेकिन स्वयं सृष्टी के पालनहार,अंतरयामी जानते थे की दुनिया से बिदा होकर वैकुंठधाम वापस जाने का समय यही हैं। भगवान श्री क्रिष्णा जरा भील को कर्म का सिद्धांत समझाकर यह सब घटना क्यो घटीत हुई,पिछले जन्म का चुकाने वाला कर्ज वगैरा पुरा वृतांत बताते हुए जरा भील को माफ कर देते हैं।घायल भगवान श्री क्रिष्णा हिरण नदी की और चल पडते हैं और अंतिम सांस लेकर अपनी जिवनलीला समेट लेते हैं।फिर उसी जगह अर्जुन भगवान श्री क्रिष्णा का अंतिम संस्कार करते हैं।

जहा भगवान श्री क्रिष्णा चले थे वह हिरण नदी के किनारे आज भी भगवान के चरणों के निशान मौजूद हैं। और जहा से 'जरा भील' ने हिरण की आंख समझकर भगवान श्री क्रिष्णा को घायल करा था,वह जगह समुद्र किनारे 'बाणगंगा' नाम से जानी जाती हैं।यह बाणगंगा का भी बहुत बडा महत्व हैं,यहा समुद्र के भीतर शिवलिंग बना हुआ हैं। भालका तीर्थ मे जहा भगवान श्री क्रिष्णा को बाण लगा था वहा भगवान श्री क्रिष्णा की सुंदर प्रतिमा हैं और सामने जरा भील की भगवान से माफी मांगती प्रतिमा हैं। अपने भक्तों का दुख दर्द दूर करने के लिए ही बार बार अवतार लेने वाले भगवान श्री क्रिष्णा ने इसी जगह से भले ही अपने शरीर का त्याग कीया हो लेकिन उनके होने का एहसास आज भी श्रद्धालुओं के मन में है। भालका तीर्थ सिर्फ भगवान श्री कृष्ण के अंतिम दिनों का साक्षी ही नहि लेकिन करोडो हिंदुओ का पवित्र तीर्थ स्थल भी हैं। भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है।आज भी लाखो की संख्या में श्रद्धालु, दर्शनार्थी, भक्त हर रोज भालका तीर्थ आते है।
भालका तीर्थ कैसे पहुचें।Bhalka Tirth Kaise pahuche।How to reach Bhalka tirth
भालका तीर्थ पहुचने के लिए आपको पहले वेरावल या सोमनाथ को ध्यान मे रखना पडेगा।
हवाई मार्ग से।By air
सबसे नजदिकी हवाईपट्टी 55km की दुरी पर केशोद एयरपोर्ट हैं,जहा की उडाने सीधे मुबई से जुडी है।फिर वहा से आप बस या ओटो टेक्षी से सोमनाथ पहुच सकते हैं।
रेल मार्ग से।By Train
सोमनाथ के सबसे समीप वेरावल रेलवे स्टेशन है, जो वहां से मात्र सात किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहाँ से अहमदाबाद व गुजरात के अन्य स्थानों का सीधा संपर्क है।
सड़क मार्ग से।By road transport
सोमनाथ गुजरात के सभी बडे शहर के सडक परिवहन से जुडा हुआ पर्यटन स्थल हैं और बस सेवा उपलब्ध हैं। मुंबई 889 किलोमीटर, अहमदाबाद 400 किलोमीटर, भावनगर 266 किलोमीटर, जूनागढ़ 85 और पोरबंदर से 122 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

ध्यान दे।Be alert
सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 9 बजे तक मंदिर दर्शन के लिए खुला रहता हैं।
प्रवेश : फ्री,दर्शन के लिए कोई शुल्क नहि हैं।
फोटोग्राफी : पूजा विधि दरमियान मंदिर के अंदर आप फोटोग्राफी या विडीयोग्राफी नहि कर सकते।
देख रेख संस्था : श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा संचालित
                        दोस्तो, आप जहा भी यात्रा करे स्वच्छता और पर्यावरण का खयाल जरुर रखे। वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सम्मान जरुर करे। आशा करता हु यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी,साथ ही कामना करता हु आपकी यात्रा आनंदमय मंगलमय हो।
                        ।। जय माताजी, जय कुबेर ।।

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