अंबाजी गिरनार महत्व। अंबाजी गिरनार कथा । Ambaji Girnar Mahatva। Ambaji Girnar Katha। Travel Teacher

                       नमस्कार दोस्तो,जब भी आप गिरनार की यात्रा करे,गिरनार की चढाई करे तब आप शायद दत्तात्रेय चरण पादुका मंदिर तक न जाये एसा हो सकता हैं लेकिन आप जैसा हर कोई, अंबाजी मंदिर तक जरुर जाता हैं। गिरनार पर्वत मे अंबाजी एक मुख्य बडा शिखर हैं,जिसकी उंचाई समुद्र सतह से लगभग 3320 feet मानी जाती हैं और तकरीबन 4840 सिढीयां की गिनती मानी जाती हैं। सनातन धर्म मे करोडो हिंदुओ की आदि शक्ति मां जग्जननी,मां भवानी,जंगदम्बिका गिरनार के शिखर पर सदैव अपने भक्तो को आशिर्वाद देने और कल्याण करने के उद्देश से बिराजमान हुई है। वैसे तो आदि शक्ति मां अंबाजी की 56 शक्तिपिठ के साथ कई बैठक हैं दुनिया भर मे,लेकिन गिरनार वाली बैठक भक्तो के लिए क्यु हैं खास और मां अंबाजी गिरनार पर क्यु हैं बिराजमान?क्या हैं वो वजह जिसके लिए मां अंबाजी को यही रहना पडा,चलो जानते हैं एक संक्षिप्त कथा के द्वारा।

अंबाजी गिरनार महत्व। अंबाजी गिरनार कथा। Ambaji Girnar Mahatva। Ambaji Girnar Katha
पौराणिक कथाओ के अनुसार सृष्टी के आरंभ मे, सतयुग मे राजा दक्ष प्रजापति के यग्य मे परमेश्वरी मां 'सती' अपने पती देवाधीदेव भगवान 'शिव' का अपने पिता राजा दक्ष प्रजापति के द्वारा हुआ अपमान सहन नहि कर सकी और यग्य कुंड मे कुद कर आत्म विलोपन कर अपना देह त्याग दीया। इस पुरी घटना के बाद भगवान शिव हिमालय मे तपस्या करने चले जाते हैं। हिमालय से जगह प्राप्त कर भगवान शिव अपनी तपस्या मे लगे रहते हैं। कुछ सालो बाद हिमालय अपनी बेटी "पार्वती" (जो मां परमेश्वरी 'सती' का ही अवतार हैं) को भगवान शिव की सेवा मे लगा देते हैं।मां पार्वती भगवान शिव की सेवा करते-करते मनोमन भगवान शिव को अपना पति स्विकार लेती हैं। कुछ स्विकार कुछ विरोध के बाद भगवान शिव और पार्वती का विवाह तय होता हैं। भगवान शिव और पार्वती के विवाह के दौरान पार्वती के बडे भाई "गिरनार" बारात मे आये हुएे सभी बारातीओ और देवो की आदर सम्मान के साथ बहुत ही सेवा की। गिरनार की यह सेवा और आदर सम्मान देख कर श्री हरी भगवान विष्णु बहुत ही प्रसन्न होकर वरदान दीया की " तु सभी पर्वतो मे साक्षात नारायण माना जायेगा,तेरे उपर सभी देवता निवास करेंगे,तेरी शरण लेकर जो भी तपस्या करेगा वो सिद्ध हो जायेगा।" इसी पार्वती के बडे भाई " गिरिनारायण" कहलाये जो बाद मे 'गिरनार' हो गया। एकबार ब्रह्माजी ने राजा इन्द्र को आदेश दीया की सभी पर्वतो के पंख काट दीये जाय ताकी,हवा मे रहने वाले पशु-पक्षी सुरक्षित रह शके और उनका नाश न हो। राजा इन्द्र को अपने पंख काटने आते देख गिरनार समुद्र मे छुप जाते हैं। बहुत समय बितने पर भी जब मां पार्वती अपने भाई गिरनार को नही देखती तो व्याकुल होकर गिरनार का पता लगाती हैं। मां पार्वती को सारी बात का पता चलता हैं और राजा इन्द्र और ब्रह्माजी को श्राप देती हैं और भगवान शिव और श्री हरी विष्णु को गिरनार को ढुंढने के लिए भेजती हैं। पता चलने पर भगवान शिव, भगवान श्री विष्णु और अन्य देवता समुद्र से प्रार्थना करते हैं,समुद्र देव प्रसन्न होकर जो मांगा जाय वो देने को कहते हैं। तब भगवान श्री विष्णु कहते हैं " राजा इन्द्र के दर से हिमालय पुत्र गिरनार तुम्हारे जल मे छुपा हुआ हैं,इसलिए आप पाँच योजन पीछे चले जाओ"। समुद्र के पीछे हट जाने के बाद गिरनार सबके दिखाई देते हैं। तब से लेकर अभी तक मां पार्वतीजी अपने भाई की रक्षा के लिए साक्षात गिरनार पर बिराजमान हो गई। मां पार्वती के यह साक्षात रुप के जो व्यक्ति दर्शन,पूजन,अर्चना,आराधना करता हैं,उनक कई जन्मो के पाप नष्ट हो जाते हैं और तुरंत ही सुखद अनुभुति को प्राप्त करते हैं,परम पद को प्राप्त करते हैं।

अंबाजी गिरनार में क्या करें। Ambaji Girnar me kya kare। What to do in Ambaji Girnar
अगर आपको पर्वत,पहाडीयो,उंचाई,जंगल,ट्रेकींग वगैरा अच्छा लगता हैं तो गिरनार आपके लिए बेहतरीन स्थल तो हैं ही, और उसमे भी अंबाजी गिरनार शिखर आपके अनुभव मे लंबे समय तक याद रहने वाला सफर हो सकता हैं। अंबाजी की चढाई आप अकेले,अपने साथी के साथ,अपने परिवार के साथ या मित्रो के साथ कर सकते हैं। अंबाजी गिरनार मे आप अकेले या अपनो के साथ दर्शन,पूजा के साथ साथ कुछ पल साथ बिता कर भरपुर मनोरंजन भी पा सकते हैं। चढाई की शुरुआत से लेकर अंबाजी तक भीड-भाड रहती हैं,इसलिए चढाई के दौरान ज्यादा सोचने वाली कोई बात नही रहती। ज्यादातर लोग अंबाजी तक की चढाई ही पसंद करते हैं। विवाहीत यहा विवाह के बाद कपडे बांधने के लिए आते हैं और मंगलमय जिवन के लिए कामना सRequest। दोस्तो,आशा रखता हु अंबाजी गिरनार की यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी और साथ ही कामना करता हु आपकी यात्रा आनंदमय मंगलमय हो। आप जहा भी यात्रा करे स्वच्छता और पर्यावरण का खयाल जरुर रखे।

नम्र निवेदन। Humble Request:

सभी श्रद्धालु,पर्यटक और यात्रीओ ध्यान रखे की भवनाथ तलहटी-गिरनार तलहटी मे आपको रुकने,रहने,खाने के लिए कई धार्मिक संस्थाओ और सेवाभावी व्यक्ति,परिवारो,समाजो द्वारा आश्रम चलाये जाते हैं। जहा रुकने की बेहतरीन व्यवस्था और खाने की उत्तम व्यवस्था होती हैं,तो आप वहा ही रुकने,खाने को प्राथमिकता दैं। यह सभी व्यवस्था निशुल्क होती हैं। आप जब भी ऐसे आश्रम या पंडाल मे रुके या खाये तब वहा की सभ्यता-संस्कृति का आदर सम्मान जरुर करे,ऐसी सेवा मे उनका सिर्फ एक ही मतलब होता हैं "महेमान भगवान होता हैं,भुखे को अन्न,प्यासे को पानी,जन सेवा वही प्रभु सेवा। अच्छे बर्ताव से कृपया उनका सहयोग करे,होसला बढाये।

गिरनार कैसें पहुचे। Girnar kaise pahuche।How to reach Girnar

गिरनार पहुचने के लिए आपको जुनागढ शहर को ध्यान मे रखना पडेगा क्योकी गिरनार पर्वत जुनागढ शहर से 4km दुरी पर स्थित हैं।
हवाई मार्ग से कैसे पहुचे। How to reach by air
जूनागढ़ का अपना हवाई अड्डा नहीं है और निकटतम हवाई अड्डा राजकोट,पोरबंदर और केशोद हवाई अड्डे हैं। राजकोट और पोरबंदर हवाई अड्डों पर मुंबई से सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। जूनागढ़ पहुंचने के लिए हवाई अड्डों के बाहर से टैक्सिया या बसों द्वारा आप जुनागढ पहुच सकते हैं।
राजकोट हवाई अड्डा 103km,पोरबंदर हवाई अड्डा 113km,केशोद हवाई अड्डा 40km
सड़क मार्ग से कैसे पहुँचे। How to reach by road
नियमित बस सेवा से जूनागढ़ गुजरात के अन्य स्थानों से जुड़ा हुआ है जैसे अहमदाबाद, भुज, भावनगर, द्वारका, सोमनाथ,पोरबंदर और राजकोट,वडोदरा,सुरत,मुंबई इन शहरों से जूनागढ़ पहुचने के लिए निजी और GSRTC वाली दोनों तरह की बसें कार्यरत हैं।
रेल मार्ग से कैसे पहुँचे।How to reach by rail
जूनागढ़ जंक्शन स्टेशन, जो शहर के केंद्र से लगभग 1 किमी दूर स्थित है,मुंबई,राजकोट,अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम,पुणे और जबलपुर जैसे स्थानों से ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
                     ।।जय माताजी,जय कुबेर ।।

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