सिद्धपुर,बिंदु सरोवर,मातृ गया।Siddhpur,Bindu Sarovar,Matru Gaya।Travel Teacher

                        दोस्तो,हमारी सभ्यता एवं संस्कृति पर अनेक आक्रमण हुए,कई प्रमाण नष्ट हुए ओर इतिहास बदले गए लेकिन "सत्य कभी छीपा नहीं रहता" इस न्याय से आज इसी सभ्यता-योग-आयुर्वेदका विश्व आविष्कार कर रहा हैं ।आज भी सनातन हिन्दु संस्कृति झगमगाती हैं,इसका मुख्य कारण यही हैं की, न केवल किसी देश या जाति विशेष की बल्की हमने समग्र ब्रह्माण्ड के कल्याणकी प्रार्थना की हैं।

                        दोस्तो,आज हम एसे ही एक एैतिहासीक नगर के बारे मे बात करेंगे जो हमारी हिन्दु संस्कृति,परंपरा,सभ्यता को अपने दिल मे बसाये बैठा हुआ है।और वो शहर है गुजरात, पाटन जिले का सिद्धपुर,जी हा दोस्तो। 10 वीं शताब्दी के आसपास, सोलंकी शासकों के आधीन, यह शहर प्रमुखता और गौरव के शिखर पर था। सिद्धपुर का नाम गुजरात के महान शासक राजा सिद्धराज जयसिंह सोलंकी से लिया गया है, जिन्होंने इस शहर में 12 वीं शताब्दी में रुद्र महल नामक एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण किया था। सिद्धपुर के पूरे शहर को मंदिरों, 'कुंडों', 'आश्रमों' और सरस्वती नदी के किनारे पवित्र इमारतों से भरा गया है। तो दोस्तो आइये जानते है सिद्धपुर के प्रसिद्ध धार्मिक एवम एैतिहासीक पर्यटन स्थलो को।

सिद्धपुर के पर्यटन एवम धार्मिक स्थल।Tourist and Religious places of Siddhpur
  • बिंदु सरोवर/मातृ गया/मोक्ष स्थल,।Bindu Sarovar,Matru gaya,Moksh Sthal :
  • सिद्धपुर में सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बिंदु सरोवर है। बिंदु सरोवर हिन्दु धर्म के पाच पवित्र सरोवर मे से एक है।
इसे श्री-स्थल या "पवित्र स्थान" के रूप में भी जाना जाता।
जिस प्रकार पितृश्राद्ध के लिए गया प्रसिद्ध है। वैसे ही मातृश्राद के लिए सिद्धपुर मे बिंदु सरोवर प्रसिद्ध है।पुराणों के अनुसार यह क्षेत्र पुण्यमय आदितीर्थ है। यहां व्यक्ति के प्रवेश करते ही सभी पापों से मुक्त हो जाता है। जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति हर हिंदू के लिए जीवन का पवित्र उद्देश्य माना जाता है। अपने लक्ष्य को हासिल करने में अपने पूर्वजों की मदद करना हर बेटे का पवित्र कर्तव्य भी माना जाता है। बिहार में गया एक ऐसा स्थान है, जहाँ दुनिया भर के हिन्दू धर्म से जुडे लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिए पिंड दान करते हैं जिसे पितृ गया कहा जाता है। गुजरात के पाटन जिले में सिद्धपुर एक ऐसी जगह है जिसे मातृ-मोक्ष स्थल माना जाता है या हिंदुओं द्वारा अपनी माँ को मोक्ष प्राप्त करने के लिए संस्कार करने के लिए पवित्र माना जाता है जिसे मातृ गया कहा जाता है। कार्तिक के महीने में बेटे द्वारा अपनी मां की मुक्ति के लिए संस्कार किए जाते हैं। रुचि का एक और मुद्दा यह है कि पिंड दान बेटों द्वारा गया में किया जाता है ताकि वे अपने पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त कर सकें वह अपनी माँ के लिए विशेष रूप से सिद्धपुर में एक अलग अनुष्ठान करते हैं ताकि मोक्ष प्राप्त कर सकें।ऐसा अनुष्ठान महत्वपूर्ण है इसलिए क्योंकि यह एक हिंदू परिवार, समाज और धर्म में एक माँ के महत्व और सम्मान को पुष्ट करता है।

ऋषि कपिल ने अपनी माता देवहुति को भगवान विष्णु के दर्शन और भक्ति की पूजा करने का निर्देश दिया जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। ऋषि कपिल ने इस बिंदू सरोवर में अपनी मां को इन धार्मिक प्रवचनों में दीक्षा दी थी इसलिए इस स्थान का महत्व है।यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि जहां ऋषि कपिल की कथा गंगासागर से जुड़ी हुई है, वहीं वह बिन्दु सरोवर से भी जुड़ी हुई हैं। इन दोनों स्थानों को जोड़ने वाला सामान्य सूत्र वह महत्व है जो इन दोनों स्थानों पर मोक्ष को प्राप्त करने में मनुष्यों को सुविधाजनक बनाते है।किंवदंती है कि भगवान परशुराम ने अपने पापों से खुद को मुक्त करने के लिए यहाँ पूजा की थी और अपनी माँ के लिए मातृ-श्राद्ध किया था।

हर साल कार्तिक के महीने में एक विशाल मेला लगता है, जहाँ दूर-दूर से लोग और आसपास के लोग इस पवित्र सरोवर में अपने माता के लिए अनुष्ठान करने आते हैं। बिंदू सरोवर को वर्तमान शासन द्वारा पूरी तरह से पुनर्निर्मित किया गया है। इस क्षेत्र को खूबसूरती से विकसित किया गया है और संस्कार करने में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सरोवर को पूरी तरह से पुनर्निर्मित किया गया है। जिसमें पार्किंग की जगह और धार्मिक समारोह को पूरा करने के लिए सभी सुविधाओं का प्रावधान कीया गया है।
  • सरस्वती नदी।Sarswati River :
  • बिंदू सरोवर के बाद सरस्वती घाट तक पहुँच जाते हैं, जिसे “मुक्तीधाम” के नाम से जाना जाता है। सिद्धपुर तीर्थ का एक मुख्य आकर्षण सरस्वती नदी भी है। यात्री पहले सरस्वती नदी में स्नान करते है।मोक्ष कर्मकांड ब्राह्मण पुजारियों द्वारा अपने जजमान (ग्राहक) के लिए इस घाट के पास सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में पीपल के पेड़ के नीचे किया जाता है। ये ब्राह्मण अपने रजिस्टर में अपने जजमान (ग्राहक) की वंशावली का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं जो बडे लाल कपड़े से बंधे होते हैं। नदी के किनारे पक्का घाट है। साथ ही सरस्वती जी का मंदिर है, सरस्वती में पानी थोड़ा बहुत रहता है। घाट से धारा अक्सर हटी रहती है। सरस्वती के किनारे एक पीपल का वृक्ष है। नदी के किनारे ही ब्रह्मांडेश्वर शिव मंदिर है। यात्री यहां मातृश्राद करते है। सरस्वती समुद्र में नहीं मिलती, कच्छ की मरूभूमि में लुप्त हो जाती है। इसलिए वह कुमारिका मानी जाती है। सरस्वती नदी लंबे समय से खोई हुई है और आज जो हम देखते हैं वह पौराणिक नदी सरस्वती का सूखा विस्तार है। सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक स्थल पर जीवन वापस लाने के लिए मॉनसून सहायक नदियों सहित अन्य स्रोतों से नदी के मोर्चे को विकसित करने और पानी निकालने के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं।
  • ज्ञान वापी।Gyaan vapi :
  • बिंदु सरोवर से थोडी दूर एक पुरानी बावली है। बिंदु सरोवर में स्नान करने के बाद यहां स्नान किया जाता है। यहां माता देवहूति भगवान कपिल से ज्ञानोपदेश प्राप्त करके जलरूप हो गई थी। वही इस ज्ञानवापी का जल है।
  • रूद्र महालय।,Rudra Mahalay :
  • गुर्जरेश्वर मूलराज सोलंकी और सिद्धराज जयसिंह द्वारा निर्मित यह अदभुत एवं विशाल मंदिर अलाउद्दीन खिलजी ने नष्ट भ्रष्ट कर दिया था। यह मंदिर सरस्वती के पास ही था। अब इसके कुछ भग्नावशेष सुरक्षित है,और कुछ भाग मुसलमानों के अधिकार में है। इस भाग में एक शिखरदार मंदिर तथा मंदिर का विस्तृत सभामंडप और उसके सामने का कुंड अब मस्जिद के काम में लिया जाता है।अहमदाबाद के उलुग खान और अहमद शाह ने 13 वीं शताब्दी के अंत में या 14 वीं शताब्दी की शुरुआत में इस भव्य शिव मंदिर को बेरहमी से नष्ट कर दिया। आसपास की दीवारों पर कोशिकाओं को एक मस्जिद में बदल दिया गया था।
  • बोहरा मुसलमानों की हवेली।Bohra musalmano ki haveli।Mension of Bohra muslim :
  • बोहरा हवेली की यात्रा इसलिए जरूरी है क्योकी,भारतीय शहरीकरण के बीच शहरी डिजाइन के ऐसे आदर्श उदाहरण की खोज करना किसी भी पर्यटक के लिए अद्भुत अनुभव होगा। बोहरा एक समृद्ध और सुसंस्कृत समुदाय है जो दुनिया के प्रमुख शहरों में फैला हुआ है। सिद्धपुर कुछ शताब्दियों से बोहरा मुसलमानों का एक प्रमुख केंद्र है। वे अपने मूल शहर सिद्धपुर से गहराई से जुड़े हुए हैं और नियमित रूप से महत्वपूर्ण सामाजिक समारोहों के लिए शहर आते हैं। लगभग एक शताब्दी पहले, उन्होंने विदेश में  कमाये धन से, एक विशिष्ट स्थापत्य शैली में बहुत सुंदर हवेली का निर्माण किया। अच्छी तरह से रखी गई पक्की सड़कें, सर्विस लेन, मस्जिदें, एक सामान्य वास्तुशिल्प शब्दावली का उपयोग करते हुए गहराई से सजाए गए घरों की सही व्यवस्था, बोहारा व्यापारियों के सामूहिक दृष्टि का प्रत्यक्ष परिणाम है।यूरोपीय प्रभावित वास्तुकला में बोहरा हवेलि काफी हद तक दाउदी बोहरा व्यापारिक समुदाय से संबंधित हैं और नजमपुरा और हसनपुरा में 18 मुहल्लों या पड़ोस में फैली हुई हैं।वे अपनी लकड़ी की वास्तुकला और आंतरिक सजावट के लिए जाने जाते हैं।
  • थली बिल्डिंग।Thali building :
  • सरस्वती नदी के विपरीत तट पर, एक वास्तुशिल्प रूप से दिलचस्प इमारत है, जिसे थली बिल्डिंग के रूप में जाना जाता है, जिसे एक प्रसिद्ध मराठा रानी, इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित है।जिन्होंने सभी महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थलों में इस तरह की इमारत परियोजनाओं का संरक्षण किया था।
  • अरवदेश्वर मंदिर।Arvdeshwar Mandir :
  • नाथ सम्प्रदाय द्वारा विकसित और देवशंकर बाप भट्ट द्वारा विकसित भगवान शिव का अरवदेश्वर मंदिर एक सिद्धपीठ माना जाता है जहाँ नियमित रूप से लघुरूद्र, महारुद्र, अतिरूद्र, अग्निहोत्र जैसी वैदिक गतिविधियाँ की जाती हैं। गुरु-शिष्य परम्परा को यहाँ देखा जा सकता है जहाँ हजारों वेद पथिक भगवान कृष्ण- संदीपनी की परंपरा में ब्रह्मचर्य का जीवन जीते हैं।
  • कार्तिकेय मंदिर।Kartikey Mandir :
  • हर साल सिद्धपुर मे ऊंट महोत्सव कार्तिक महीन के दौरान 11 वें दिन से 15 वें दिन तक आयोजित किया जाता है। जिसे कार्तिक पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है।यह एक पशुधन मेला है जिसमें आसपास के शहरों और गांवों के स्थानीय लोग और आदिवासी लोग भाग लेते हैं। मेले के दौरान ऊंट और घोड़ों को उनके मालिकों द्वारा शानदार ढंग से सजाया जाता है, उन्हें प्रदर्शित करने, खरीदने या बेचने के लिए। किसान भारी मात्रा में गन्ना लाते हैं जिसे विभिन्न अन्य स्थानीय हस्तशिल्प वस्तुओं के साथ भी बेचा जाता है। इस मेले के दौरान एक सप्ताह के लिए कार्तिकेय मंदिर खुलता है।
  • अन्य दर्शनीय स्थल।Other seeing places :
  • रुद्र महाकाल मंदिर और जामी मस्जिद सिद्धपुर में अन्य दर्शनीय स्थल हैं क्योंकि ये दोनों स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत संरक्षित स्मारक हैं। सरकार ने इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं।इसके अलावा सिद्धपुर मे कई दर्शनीय मंदिर भी है। जिनके भी दर्शन भी किए जा सकते है। सिद्धेश्वर मंदिर, गोविंदमाधव मंदिर, हाटकेश्वर मंदिर, भूतनाथ महादेव मंदिर, श्री राधा-कृष्ण मंदिर, रणछोड़ जी मंदिर, नीलकंठेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, ब्रह्मांडेश्वर मंदिर, अम्बा माता मंदिर, कनकेश्वरी मंदिर तथा आशापुरी माता मंदिर मुख्य रूप से दर्शनीय है।

श्री हर्षबिन्दु सरोवर,अल्पा सरोवर,मातृगया तीर्थ,श्रीकर्दमाश्रम,गूहेश्वर महादेव - जैसे स्थान एक ही जगह पर हैं।

कैसे पहुचे।How to reach

हवाई मार्ग से :
देश के अन्य प्रमुख शहरों से सिद्धपुर के लिए नियमित उड़ानें नहीं हैं। निकटतम हवाई अड्डा अहमदाबाद हवाई अड्डा है।

रेल मार्ग से :
मुंबई को दिल्ली से जोड़ने वाली ब्रॉड गेज रेलवे लाइन सिद्धपुर से होकर गुजरती है।सिद्धपुर नियमित ट्रेनों के माध्यम से देश के अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

सडक मार्ग से :
पश्चिमी राजमार्ग अहमदाबाद को पालनपुर से जोड़ता है और सिद्धपुर अहमदाबाद से 130 किलोमीटर दूर इस राजमार्ग पर स्थित है। आप आसानी से देश के अन्य प्रमुख शहरों से सिद्धपुर के लिए नियमित बसें प्राप्त कर सकते हैं। महेसाणा, आबू और गुजरात के प्रमुख शहरों से बस सेवाएं भी उपलब्ध है।महेसाणा से सिद्धपुर जाते,बिंदु सरोवर सिद्धपुर शहर से बिलकुल पहले ही आ जाता है।

                        तो दोस्तो,यह थी सिद्धपुर के एैतिहासीक और धार्मिक पर्यटन स्थलो की कुछ माहिती।आशा रखता हु यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी,साथ ही कामना करता हु यह जानकारी आपको फायदेमंद हो।आप जहा भी यात्रा करे स्वच्छता,पर्यावरण का जरुर ख्याल रखे।आपकी यात्रा आनंदमय,मंगलमय हो।

(वास्तविक यात्रा और स्थानीय लोगो से मीली जानकारी के आधार पर)

                        ।। जय माताजी,जय कुबेर ।।

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